देश में बनी विदेशी शराब का लीजिए मजा

दिल्ली सरकार ने तय किया है कि देशी शराब (कंट्री लिकर) की बजाय देश में निर्मित विदेशी शराब (दिल्ली मीडियम लिकर) को वरीयता दी जाएगी। देशी शराब का मानक स्तर कम होता है जो स्वास्थ्य के लिए ज्यादा हानिकारण होता है। दिल्ली मीडियम लिकर स्वास्थ्य की दृष्टि कम हानिकारक रहेगा। इस शराब की जांच के मानक सख्त होंगे, हालांकि शराब थोड़ी महंगी होगी।
दिल्ली सरकार के अनुसार इसकी शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दो महीने में हो जाएगी। अगर लोगों ने इसे पसंद किया 2013 तक देशी शराब पूरी तरह से फेसआउट कर दिया जाएगा। यहां देशी शराब की बिक्री बहुत ज्यादा है। इसलिए देशी शराब की बिक्री बंद करके बेहतर गुणवत्ता वाली शराब उतारने का फैसला किया गया है। देशी शराब की बिक्री बंद करने वाला उत्तर भारत का पहला राज्य दिल्ली बन जाएगा।
सरकारी अधिकारी बताते हैं कि देशी शराब के नकली ब्रांड भी आसानी से मिल जाते हैं। देशी शराब की तस्करी से उसकी जांच भी मुश्किल होती है। दिल्ली मीडियम लिकर के मार्क से धर पकड़ आसान हो जाएगी। नई शराब उन्हीं 104 बिक्री केंद्रों पर मिलेगी जहां देशी शराब मिलती है। शराब की कीमत प्रति बोतल 10-20 रुपये अधिक होगी। नई शराब की बिक्री शुरू किए जाने से सरकार को करीब एक करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा।
दिल्ली सरकार ने सौर जल ताप (सोलर वाटर हीटर) के प्रोत्साहन पर छूट जारी रखने का फैसला किया है। वर्ष 2012-13 में छूट जारी रहेगी। घरेलू उपभोक्ता को 6000 रुपये छूट दी जाती है। शुरुआत दिसंबर, 2006 में हुई थी। इसे नवंबर, 2007 में बढ़कर गैर वाणिज्यिक क्षेत्र के संस्थानों के लिए लागू कर दिया। एक सौ लीटर प्रतिदिन की क्षमता पर छह हजार रुपये, का प्रोत्साहन दिया जाने लगा जबकि अधिकतम एक हजार लीटर की क्षमता वाली अधिकतम प्रोत्साहन राशि 60 हजार रुपये दी जाती है। अभी तक दिल्ली में दैनिक 4.40 लाख लीटर क्षमता के 1291 सौर जल ताप प्रणाली लगाई जा चुकी है। इससे करीब 66 लाख यूनिट बिजली की बजट हुई है। योजना को एक साल बढ़ाए जाने से बिजली बचत को बढ़ावा मिलेगा।
दिल्ली कैबिनेट ने दिल्ली सरकार कर्मचारी स्वास्थ्य योजना में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह योजना 1997-98 में लागू की गई थी। इसके जरिए केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना की तरह दिल्ली सरकार के कर्मचारियों, पेंशनधारियों और उनके परिजनों को चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जाती है। यह तय किया गया है कि पेंशनधारियों के चिकित्सा बिलों के पुनर्भुगतान के काम का विकेंद्रीकरण किया जाए। बिल में लेटलतीफी न हो इसलिए कर्मचारियों या पेंशनधारियों के बिल दावे संबंधित विभाग में वहीं देखे जाएं जहां से वे सेवानिवृत्त हुए हैं। बहुत साल पहले भी इसी तरह बिल भुगतान किए जाते थे। निजी अस्पतालों और निदान केंद्रों में पेंशनधारियों के नगदीरहित उपचार का भुगतान दिल्ली सरकार स्वास्थ्य योजना प्रकोष्ठ ही करता रहेगा।












Click it and Unblock the Notifications