बुखारी के सामने झुके मुलायम, कहा अब शिकायत नहीं मिलेगी

mulayam singh yadav
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री आजम खां से वाकयुद्ध से उत्पन्न विवाद के बीच दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना बुखारी ने आज सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की। बुखारी ने इस मुलाकात के बाद बताया कि सपा प्रमुख से करीब एक घंटे की मुलाकात में मैंने मुसलमानों को प्रदेश मंत्रिपरिषद, विधान परिषद तथा प्रशासन में समुचित भागीदारी नहीं दिये जाने की शिकायत की।

हम भीख नहीं बल्कि अपना हक मांग रहे हैं। उन्होंने कहा मैंने मुलायम सिंह यादव से कहा कि मुसलमानों ने सपा को अपने वोट के जरिये उत्तर प्रदेश का तख्त-ओ-ताज दिया है। यह पहला मौका था जब आपको मुसलमानों को वाजिब हिस्सेदारी दिखानी चाहिये थी। आपने मुसलमानों को ना तो कैबिनेट में मुसलमानों को पूरी हिस्सेदारी दी और ना ही राज्यसभा में।

करीब 80 फीसद मुसलमानों ने बड़ी उम्मीदों से सपा को वोट दिया है और ऐसे में मेरा फर्ज बनता है कि मैं उनकी बात आपके सामने रखूं। बुखारी ने दावा किया कि सपा प्रमुख ने राज्य की कैबिनेट में दो और मुस्लिम मंत्री शामिल करने, विधान परिषद के आगामी चुनाव में उनके दामाद उमर के साथ-साथ बसपा प्रमुख मायावती द्वारा छोड़ी गयी सीट के चुनाव के लिये मुसलमान प्रत्याशी उतारने तथा प्रशासन में मुस्लिम अफसरों को समुचित भागीदारी का वादा किया।

बैठक में प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी मौजूद थे। गौरतलब है कि बुखारी को मुलायम सिंह मुलाकात के लिये कल ही लखनऊ आना था लेकिन वह अपरिहार्य कारणों से नहीं पहुंच सके थे। इसे लेकर तरह-तरह की अटकलें लगायी जा रही थीं।

शाही इमाम ने कहा अगर मुसलमानों को उनकी आबादी के लिहाज से हिस्सेदारी नहीं मिली तो मैं खामोश नहीं बैठूंगा। मेरा फर्ज है कि मैं मुसलमानों के हक के लिये उनकी नुमाइंदगी करूं। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख ने उनसे वादा किया कि भविष्य में इस मामले को लेकर शिकायत का कोई मौका नहीं दिया जाएगा।

यादव से आजम खां के बारे में कोई बात होने सम्बन्धी सवाल पर उन्होंने कहा इस बारे में मेरी कोई बात नहीं हुई। मैं फुजूल की बातों को तवज्जो नहीं देता। बुखारी ने स्पष्ट किया कि उनके दामाद उमर अली खां विधान परिषद के आगामी चुनाव के लिये कल नामांकन दाखिल करेंगे। गौरतलब है कि आजम खां ने पिछले दिनों बुखारी पर मुसलमानों के साथ नाइंसाफी के नाम पर सपा सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा था।

शाही इमाम अपने भाई याहया बुखारी के लिये राज्यसभा से सपा का टिकट चाहते थे जिससे इनकार किये जाने पर वह मुसलमानों को वाजिब हक के नाम पर सरकार पर कीचड़ उछाल रहे हैं। बुखारी ने खां पर आरोप लगाया था कि वह मुसलमानों को सत्ता में जायज हक देने की लड़ाई को निजी हितों की लड़ाई बताकर दूसरा रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

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