तिहाड़ में टैलेंट को बढ़ावा, मौज करने वालों से सख्ती

Jail
दिल्ली (ब्यूरो)। तिहाड़ जेल की कैदी जल्द अपना आइडल चुनेंगे। इंडियन आइडल की तर्ज पर इसके विजेता को पंजाबी और हिंदी गीतों के एलबम में गाने का मौका मिलेगा। इसके लिए इसी हफ्ते ऑडिशन शुरू होनेवाला है। दूसरी और तिहाड़ जेल के उन कैदियों पर नजर रखी जा रही है जो बीमारी का बहाना बना कर मौज मस्ती करते हैं।

प्रोडक्शन हाउस आरवीपी डायरेक्टर्स तिहाड़ जेल के नौ जेलों में बंद कैदियों में गायकों, गीतकारों और संगीतकारों को खोजेगा। इसके लिए जेल में ऑडिशन होगा। तिहाड़ जेल के डीआईजी आरएन शर्मा के मुताबिक तिहाड़ में सारंगी वादक कमल साबरी की संगीत एलबम 'सारंगी रिडिफाइन्ड' की लांचिंग की खबर पढ़कर आरवीपी डायरेक्टर्स ने हमसे संपर्क साधा। 'इंडियन आइडल' की तरह हमारा अपना 'तिहाड़ आइडल' होगा। 'सारंगी रिडिफाइन्ड' में तिहाड़ के कैदियों ने संगीत दिया है। आरवीपी डायरेक्टर्स के मालिक राहुल सुनेजा कहते हैं कि अखबारों में खबर छपी थी कि जेल के डीजी नीरज कुमार जेल में रॉकबैंड बनाना चाहते हैं। हमने सोचा यदि जेल में प्रतिभा है तो क्यों न इसे बेहतर प्लेटफार्म दिया जाए।

उधर तिहाड़ जेल प्रशासन बीमारी का बहाना बनाकर अस्पतालों में आराम फरमा रहे कैदियों का रिकार्ड खंगालना शुरू कर दिया है। दरअसल, तमाम कैदी बीमारी की आड़ में अपने घर वालों से मिलने के लिए बाहर के अस्पतालों में भर्ती होते हैं। जेल प्रशासन ने चर्चित चोर बंटी के मामले में भी त्वरित कार्रवाई करते हुए इहबास अस्पताल प्रशासन से पूछा है कि वहां पर उसे रखना कितना जरूरी है।जेल प्रशासन की ओर से जेल से अस्पताल जाने वाले सभी कैदियों के रिकार्ड खंगाला जा रहा है। जनवरी से अब तक एक सौ से अधिक ऐसे कैदियों के मामले प्रकाश में आए है, जो डीडीयू समेत दूसरे अस्पतालों में अपने परिवार वालों से मिलने के बहाने जाते थे। तिहाड़ जेल प्रशासन के पास ऐसी सूचनाएं पहुंची हैं कि कई कैदी सीने में दर्द, अनिद्रा, बुखार, आंखों में जलन, सांस की समस्या आदि बीमारियों को लेकर दूसरे अस्पतालों में पहुंचे, लेकिन जांच की गई तो पता चला कि इन कैदियों को कोई खास बीमारी नहीं है बल्कि ये अपने परिजनों से मिलने के लिए आए हैं।

ऐसे कैदियों का उपचार अब तिहाड़ में ही किया जाएगा। यहीं नहीं जेल के डॉक्टर बीमारी की पूरी जांच करने के बाद ही दूसरे अस्पताल में इलाज के लिए भेजेंगे। इससे पहले जेल मुख्यालय को भी इसकी सूचना देनी होगी। एक अधिकारी की मानें तो ऐसे कैदियों की कमी नहीं है, जो बीमारी का बहाना बनाकर बाहर के अस्पतालों में इलाज कराने चले जाते है। इन कैदियों को कोई खास बीमारी नहीं है, बल्कि ये अपने परिवार वालों से मिलने जाते हैं। जेल के प्रवक्ता सुनील गुप्ता ने बताया कि बीमारी की झूठी वजह बताकर अस्पताल जाने वाले कैदियों की अब खैर नहीं। ऐसे कैदियों के रिकार्ड को खंगाल कर कार्रवाई की जाएगी। इहबास में भर्ती बंटी का इलाज अस्पताल में ही कराने पर विचार चल रहा है। वहां वह दो माह से इलाज करा रहा है।

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