ख्वाजा से दोनों देशों के बीच अमन की दुआ मांग पाक लौटे जरदारी

जरदारी जब अजमेर पहुंचे तो यहां के तमाम लोगों की वो यादें ताज़ा हो गईं जब पाक की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो यहां आयी थीं। उस दौरान भुट्टो अपने पति की जेल से रिहाई के बाद अपनी मन्नत पूरी होने पर धागा खोलने आयी थीं।
दरगाह के मौलवी हुसैन साहब ने जरदारी की रवानगी के बाद कहा कि उन्हें बहुत अच्छा लगा कि दरबार में जरदारी जैसे लोग आये। उन्होंने यहां के लगभग सभी सदस्यों से हाथ मिलाया, जिससे यह साबित होता है कि वो दोनों देशों के बीच अमन चैन चाहते हैं। हुसैन के मुताबिक जरदारी ने अपना संदेश लिखा और शांति एवं अमन का प्रतीक भेंट किया। इस भेंट से पता चलता है कि उन्होंने यहां दोनों मुल्कों में भाईचारे के लिए दुआ की।
अजमेर प्रशासन के मुताबिक जरदारी को वो फोटो भेंट की गई, जिसमें बेनजीर भुट्टो अजमेर आयीं थीं। साथ ही प्रशासन ने जरदारी को बेनजीर द्वारा लिखे गये संदेश की कॉपी भी भेंट की।
माना जा रहा है कि जरदारी साहब पाकिस्तान की मुश्किलों को कम करने की दुआ मांगने के साथ-साथ अपने बेटे की अच्छी सियासी शुरुआत के लिए दुआ मांगी। दरगाह प्रशासन का कहना है कि जरदारी पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने 5 करोड़ जितनी बड़ी धनराशि दान में दी है। इस धन को दरगाह के विकास में इस्तेमाल किया जायेगा।
इससे पहले जरदारी पाकिस्तान से दिल्ली आये थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ दोपहर का भोजन किया। इस दौरान दोनों देशों के प्रमुख ने कहा कि यह एक पहल है, भारत-पाक को करीब लाने की। जल्द ही दोनों देश शांति वार्ता को आगे बढ़ायेंगे, जो पिछले कई सालों से रुकी हुई है।
कुल मिलाकर देखा जाये तो इस यात्रा ने हिन्दुस्तान-पाकिस्तान के बीच अमन का वो संदेश दिया है, जो शायद आतंक के बाशिंदों को कभी नहीं समझ आयेगा। दोनों देश आतंकवाद से सबसे ज्यादा घायल हुए हैं। वैसे सच पूछिए तो भारत की तुलना में पाकिस्तान आतंकवाद का शिकार ज्यादा हुआ है। और अब दोनों देशों के सियासी प्रमुख और आम जनता इससे निजाद चाहती है। खैर एक सच यह भी है कि ख्वाजा की दरगाह से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। तो जरदारी द्वारा की गई दोनों देशों के बीच अमन की दुआ भी जरूर कुबूल होगी।












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