भ्रष्टाचार में जान गंवा चुके लोगों के परिजन अन्ना के मंच पर

गुजरात से भगवान दास भी आए हैं। वे अमित जेठवा के लिए न्याय की गुहार लगाएंगे जिन्होंने गिर में आंदोलन के दौरान हत्या कर दी गई थी। आंध्रप्रदेश के सीतारामपुरम गांव से सुगना रागाराव भी आईं हैं। वहां गांव में मजदूरी करती है और बमुश्किल प्रतिदिन 60 से 70 रुपया कमाती हैं।
पति सोला रंगाराव विकलांग होने के बावजूद परिवार चलाने में पूरा साथ देते थे तो परेशानी नहीं होती। मगर दो साल पहले 5 अप्रैल 2010 को गांव में एक सड़क के निर्माण में जिस तरह भ्रष्टाचार का मामले को उन्होंने उठाया जान से हाथ धोना पड़ा। तब से आज तक न्याय के लिए लड़ाई लड़ रही सुगना को उम्मीद है कि आज जंतर मंतर पर अन्ना हजारे के साथ अपनी बात लोगों तक रखेगी तो कुछ न कुछ अंजाम निकलेगा।
सुगना की तरह ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े गुजरात गिर के अमित जेठला जिन्होंने गिर में अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाई और जान गंवा बैठे इनके दोस्त भगवान दास, झारखंड के डालटेनगंज से ताल्लुक रखने वाले ललित कुमार महतो जिन्होंने मनरेगा में व्याप्त धांधली को सबके सामने उजागर क्या किया जान से हाथ धो बैठे, इनकी पत्नी आश्रिता महतो समेत देश के अलग-अलग राज्यों से आए एक दर्जन से अधिक पीडि़त अन्ना के साथ मंच से अपनी बात को बयां करेंगे।
कुल मिलाकर अन्ना के आंदोलन में अबकी दफा वह लोग बड़ी संख्या में हिस्सा लेने वाले हैं जिनके अपने भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए बावजूद इसका ग्राफ चरम पर है और जिन्होंने लड़ाई लड़ी वह न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।












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