इस्तीफा नहीं देता तो गिर जाती यूपीए सरकार: दिनेश त्रिवेदी

नई दिल्ली। भारतीय राजनैतिक इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी रेल मंत्री को रेल बजट पेश करने के बाद अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। दिनेश त्रिवेदी जा चुके हैं और उनकी जगह मुकुल रॉय को रेलमंत्री बना दिया गया है। यह सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि किसी को यकीन नहीं हुआ कि आखिर हुआ क्यों?

कारण बताया गया कि बढ़ा किराया दिनेश त्रिवेदी के लिए गले की फांस बन गया है। इसलिए दिनेश को टाटा-बॉय-बॉय बोलना पड़ा। अभी लोग इस बात से उबर भी नहीं पाये थे कि दिनेश त्रिवेदी के बयान ने सबको चौंका दिया और एक बाऱ फिर से लोग सोचने के मजबूर हो गये कि राजनीति में जो सामने दिखता है वो पूरा सच नहीं होता है।

दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि यह तो पहले से तय था कि उन्हें रेलमंत्री के पद से हटाया जाना है। बढ़ा किराया तो एक मुद्दा बन गया है। उनकी पार्टी के लोगों को पता था कि वो इस बार रेल बजट में यात्री किराया बढ़ाने जा रहे हैं।

बिना किसी का नाम लिए त्रिवेदी ने कहा कि बनर्जी का एक करीबी नौकरशाह इन चीजों के बारे में जानता था। त्रिवेदी ने कहा कि मेरी नेता का एक करीबी नौकरशाह सारी बातों के बारे में पूरी तरह जानता था और उसने मुझसे कहा कि अगर मैंने किराया वृद्धि नहीं किया तो रेलवे चरमरा जाएगी जिस कारण से मैंने उससे बात की थी ताकि नेता को सूचित किया जा सके। इसलिए वह यह मानने को कतई तैयार नहीं है कि उस नौकरशाह ने ममता बैनर्जी को यह बात नहीं बतायी होगी और तो और उन्होंने यह भी कहा कि अगर वो इस्तीफा नहीं देते तो यूपीए की सरकार गिर जाती।

त्रिवेदी का यह बयान जहां एक राजनैतिक साजिश की कहानी कह रहा है वहीं दूसरी ओर त्रिवेदी को भी कटघरे में खड़ा करता है कि अभी तक तो त्रिवेदी यही कह रहे थे ममता बैनर्जी को रेलकिराये के बारे में कुछ भी नहीं मालूम और उन्होंने तत्काल इस्तीफा दे दिया। अब जब वो पद पर नहीं है तो अब इस तरह का बयान देकर साबित क्या करना चाहते हैं? वो अभी तक चुप क्यों थे?

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