कट्टर राष्ट्रवादी अंशुमन बीजेपी के लिए मुसीबत लेकर आए हैं

महेश योगी के शिष्य अंशुमन 16 साल की उम्र में ही देश बाहर चले गए थे। अंशुमन सबसे पहले तब चर्चा में आए थे, जब पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद उन्होंने अमेरिका में भारत की जबरदस्त तरफदारी की मुहिम चलाई थी। सहारा के मालिक ने खुलकर अंशुमन मिश्रा के नाम का विरोध किया था। वहीं नरेश गोयल, मुकेश अंबानी, कुमारमंगलम, बिड़ला व रूईया बंधु मिश्रा अंशुमन के साथ हैं। मिश्रा के नाम का सबसे ज्यादा विरोध जेतली करीबी झारखंड के सांसद निशिकांत दुबे ने किया, दरअसल दुबे जो अब तक रूईया बधुओं (एस्सार ग्रुप) के लिए कॉरपोरेट लॉबिंग करते आए हैं, वे नहीं चाहते थे कि झारखंड से किसी और ब्राह्मण चेहरे का अभ्युदय हो। वहीं दुबे को अंशुमन मिश्रा की अपने कॉरपोरेट बॉस शशि व प्रशांत रूईया के साथ नई नवेली दोस्ती भी रास नहीं आ रही।
अंशुमन को राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने पर बीजेपी के अंदर भारी नाराजगी है। कुछ नेताओं ने तो बगावती सुर अपना लिया है। संसदीय दल की बैठक में झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार अंशुमन मिश्रा को समर्थन देने के बीजेपी के फैसले के खिलाफ शांता कुमार और यशवंत सिन्हा ने मोर्चा खोल दिया है। शांता कुमार ने तो यहां तक कह दिया कि विवेकानंद के मुताबिक जिस पार्टी में लक्ष्मी का महत्व बढ़ता है, वह पार्टी डूब जाती है। यशवंत सिन्हा ने भी कहा कि जिस नेता का न झारखंड से संबंध है और न ही बीजेपी से, उसके लिए बीजेपी विधायकों को वोट देने के लिए कहना गलत है। सिन्हा ने पार्टी छोड़ने तक की धमकी दे दी। हालांकि बाद में वह अपनी बात से मुकर गए। सदस्यों के गुस्से को देखते हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने नेताओं को आश्वासन दिया है कि वह इस बारे में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी से बात करेंगे। इस बीच खबरें हैं कि वह नामंकन वापस ले सकते हैं। ऐसा लग रहा है अंशुमन भाजपा के लिए मुसीबत बन कर आए हैं।












Click it and Unblock the Notifications