समलैंगिकता मानसिकता नहीं, सेक्सुअलिटी का तरीका है

एक समलैंगिक अधिकार संगठन की ओर से न्यायालय में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि समलैंगिकता सेक्सुअलिटी का एक सामान्य रूप है। यह कोई मानसिक विकार और मनोचिकित्सीय विकार नहीं है। कई समलैंगिक पुरूष और महिला बच्चे पाल रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपनी रिपोर्ट पेश कर उन सभी कानूनी प्रावधानों को रद्द करने की सिफारिश की है जो समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी में रखते हैं।
उन्होंने कहा कि विज्ञान के अनुसार लोगों में वयस्क होने से पहले ही इस तरह की भावना पैदा हो जाती है। यह भावना बचपन के मध्य और वयस्क बनने के बीच के दौर में पैदा होती है। दीवान ने यह भी बताया कि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त ने महासभा में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में समलैंगिकता को अपराध बताने वाले सभी कानूनी प्रावधानों को खत्म करने की सिफारिश की है। न्यायालय की पीठ ने कहा कि लोगों को यौन आधार और रहन-सहन के तौर तरीकों से निरपेक्ष होकर सम्मान नहीं मिल पाना समाज की असफलता है।












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