यूपी के किंग के साथ अखिलेश किचनकिंग भी
अखिलेश यादव का भारतीय खानपान और संस्कृति से गहरा रिश्ता है। राजनीतिक व्यस्तताओं और देर रात तक जागने के बाद भी सुबह उठना, टहलना और कसरत करना उनकी जीवनचर्या है। वह दावतों या फाइव स्टार होटलों की चकाचौंध में अपने हाथों से ही दाल-चावल खाते हैं जैसे घर की डाइनिंग टेबल पर। देशी आमों को चूसकर खाने में उन्हें मजा आता है। अमरूद के बेहद शौकीन हैं।
जब सैफई आते हैं, सुबह ट्रैक सूट, स्पोर्ट्स शू पहने मास्टर चंदगीराम और एथलेटिक स्टेडियम की ओर पैदल ही निकल पड़ते हैं। फुटबाल, वॉलीबाल और क्रिकेट खेलने और मैच देखने का भी शौक रखते हैं। पिता की अपेक्षा वह कुश्ती के कम शौकीन हैं पर दांवपेचों की अच्छी जानकारी रखते हैं। पहलवानों पर उन्हें भरोसा बहुत है। सैफई के सांई सेंटर में कुश्ती की कोचिंग कर रहे युवाओं से मिलना और उनके खानपान, रहन सहन के बारे में हर समय जानकारी करते रहते हैं।
नाश्ते में पपीता उनकी टेबल पर होना जरूरी है। संतरे का जूस, मट्ठा पसंद है। तले-भुने खाने से परहेज करते हैं मगर पकौड़ीं और चिप्स सामने आ जायें तो हाथ नहीं रुकते। एक बार उनके साथ सैफई में नाश्ते में बैठे डॉक्टर से पूछ ही लिया था कि एक पकौड़ी मुंह में देते ही हाथ क्यों नहीं रुकते। पोहा, सेंवई, दलिया, मैक्रोनी के अलावा सुबह के नाश्ते में मेथी, बथुआ, आलू, गोभी के पराठे पसंद है। अखिलेश की पर्यावरण में गहरी रूचि है। आस्ट्रेलिया में क्रीक (नहरों) के किनारे पेड़ पौधे और फूलों को देखकर वह बहुत खुश होते और भारत के लिए उसी तरह की परिकल्पना करते।













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