राज्य चलाएंगे भोजन बर्बादी रोको अभियान

सरकारी व निजी कार्यक्रमों में भोजन की बर्बादी रोकने के प्रयास में अपने नियम कायदों से चल रहे राज्यों को केंद्र सरकार ने केंद्रीय दिशा-निर्देशों को लागू करने की हिदायत दी है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मामलों के मंत्रालय ने इस मसले पर व्यापक अभियान को दिशा देने के लिए राज्य सरकारों को आगाह किया है।
दरअसल कई राज्यों ने पहले से खाद्य सामग्री के नुकसान के बचाव में नियम बनाए हैं, जिसके चलते केंद्रीय अभियान की हवा निकल सकती है। यही वजह है कि केंद्र ने कोई जोखिम न उठाते हुए राज्यों को अपने तौर-तरीकों से चलने को कहा है। देशभर में हर साल लगभग 40 प्रतिशत भोजन बर्बाद होता है जिसके लिए सिर्फ शादी, पार्टी या कार्यक्रम जिम्मेदार नहीं है, बल्कि छोटे से लेकर बड़े होटल और रेस्टोरेंट भी उत्तरदायी हैं।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री केवी थॉमस के मंत्रालय ने बुद्धिजीवी वर्ग की ओर से उठी मांग पर खाद्य सामग्री के नुकसान के बचाव के लिए सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में एक 16 सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति उपभोक्ता क्लब नाम की योजना के तहत पूरे देश में स्कूलों, कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों समेत अन्य स्थानों पर इस ओर जागरूकता लाने का कदम उठा चुकी है। जबकि राज्य सरकारें अपने नियमों के अनुरूप कार्य कर रही हैं। इस कारण केंद्रीय योजना असफल न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने पहले कदम उठाते हुए राज्य सरकारों को अपने रास्ते पर चलने को कहा है।
सुभाष चंद्र अग्रवाल की आरटीआई के जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह साफ किया है कि राज्य सरकारों को केंद्रीय दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए साफ तौर पर कह दिया गया है। वहीं दस माह पहले गठित समिति के कार्यकाल को 31 मार्च तक के लिए बढ़ा दिया गया है। पीएम कार्यालय ने अपने जवाब में कहा है कि राज्यों को यह ताकीद कर दिया गया है कि वह अपने नियम-कायदों में संशोधन कर केंद्रीय समिति की ओर से जारी दिशा-निर्देशों को लागू करें। ताकि देश भर में भोजन की बर्बादी पर लगाम कसी जा सके।












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