सपा राज में अब गुंडागर्दी नहीं चलेगी: अखिलेश

लखनऊ। प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने जा रही समाजवादी पार्टी का शासन इस बार बदला-बदला सा होगा। पार्टी युवराज अखिलेश यादव सपा की छवि को बदलने में जुटे हैं। उनका दावा है कि सपा सरकार में अब गुंडों की खैर नहीं होगी वहीं पार्टी को कोई भी नेता यदि पार्टी की छवि को बिगाडऩे का प्रयास करेगा तो उसे बक्शा नहीं जायेगा। अखिलेश यादव ने राजधानी में लगे स्वागत होर्डिंग्स तक को हटाने के निर्देश दे दिए हैं।

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले अखिलेश यादव ने सभी जिला अध्यक्षों को भेजे निर्देशों में कहा है कि नेता और कार्यकर्ता अपनी कारों पर पार्टी के झंडे नहीं लगायेंगे। वाहनों पर हूटर और बडी लाईटें दिखायी नहीं देनी चाहिये। अखिलेश ने मुख्यमंत्री आवास तथा राजधानी लखनऊ के कई इलाको में सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव तथा उन्हें बधाई देने वाले कई होर्डिंग्स को हटवा दिया।

गत छह मार्च को चुनाव परिणाम आने के बाद हिंसा की कई घटनायें हुई हैं जिसमें चार लोगों की मृत्यु हुई है। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद श्री यादव ने साफ कर दिया कि कानून व्यवस्था ठीक रखना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। अखिलेश यादव ने हिंसा की हुई घटनाओं को लेकर राज्य के मु य सचिव अनूप मिश्रा और पुलिस महानिदेशक अतुल को सपा मुख्यालय में तलब किया था तथा कानून व्यवस्था बनाये रखने को लेकर सख्त कदम उठाने के निदेश दिये थे।

उनका संदेश साफ था कि अब कोई भी ऐसी हरकत सहन नहीं होगी जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति खराब होती हो। मुलायम ङ्क्षसह यादव ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी कि कानून से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बक्शा नहीं जायेगा चाहे वह पार्टी का नेता और कार्यकर्ता ही क्यों नहीं हो।

अखिलेश यादव ने कहा था कि बसपा सरकार में नियुक्त किये गये कुछ अधिकारी सपा की छवि बिगाडऩा चाहते हैं और ङ्क्षहसा की घटनायें उसी की देन है। सपा की सरकार बनने के बाद ऐसे अधिकारियों को चिन्हित करके कार्रवाई होगी। वहीं मुलायम ङ्क्षसह यादव और भावी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की चेतावनी के बावजूद सपा कार्यकर्ताओं का बसपा समर्थकों पर हमला जारी है।

हरदोई के संडीला में सपा और बसपा समर्थकों के बीच हुये संघर्ष में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गयी और पांच अन्य घायल हो गये। पुलिस के अनुसार बसपा के वर्तमान प्रधान और सपा के पूर्व प्रधान के बीच सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर संघर्ष हुआ। एटा में भी शुक्रवार को सपा और बसपा समर्थकों के बीच इसी तरह की घटना हुई थी जिसमें तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया और चालीस के खिलाफ मुकदमें दर्ज हुए। एटा के बिरामपुर गांव में सपा कार्यकर्ताओं ने हमला किया और चुनाव में पार्टी के पक्ष में वोट नहीं देने पर वृद्ध महिलाओं और पुरूषों की पिटाई की। हालांकि पुलिस ने इस घटना में सपा कार्यकर्ताओं का हाथ होने से इन्कार किया है।

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