चमकेगा राहुल का राजनीतिक करियर या लगेगा ग्रहण!

राहुल 5 साल तक गांवों की धूल छानते रहे और दलितों के घरों पर रहकर वहां खाना तक खाया। उनकी इस मेहनत का कितना असर होता है इसका फैसला भी आज 6 मार्च को हो जाएगा। इन 5 साल में ऐसा कोई वर्ग नहीं होगा जहां राहुल ने समर्थन जुटाने में कोई कसर छोड़ी हो। उत्तर प्रदेश में एक्जिट पोल के जो नतीजे सामने आए हैं उसमें तो साफ हो गया है कि राहुल गांधी का सफर अभी तक अधूरा है।
यूपी में राहुल गांधी ने अपने अभियान की जोरदार शुरुआत की थी। पिछले 22 साल से उत्तर प्रदेश की सत्ता से बेदखल कांग्रेस की वापसी कराने के लिए यूपी की मुहिम को अपने कंधों पर ढ़ोने की कोशिश में लगे राहुल गांधी ने राज्य के किसी भी बड़े नेता का साथ नहीं लिया। पार्टी की नैया अपने अकेले दम पर किनारे लगाने के लिए उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी।
उत्तर प्रदेश में शाम तक साफ हो जाएगा कि राहुल के राजनीतिक करियर का सूरज चमकता है या फिर उनके राजनीतिक करियर को ग्रहण लगता है। अगर राहुल गांधी यूपी में कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार करा पाते हैं तो यह उनके करियर में मील का पत्थर होगा। वहीं अगर पार्टी धराशाई हो गई तो यह साफ हो जाएगा कि राजनीति में लोगों ने उन्हें अभी गंभीरता से लेना शुरू नहीं किया है।












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