मिशन 2014 फतेह करना है तो अखिलेश को बनाओ सीएम

वो भी विकास चाहते है। यही फर्क रहा मुलायम की राजनीति और अखिलेश यादव की राजनीति में। पत्नी डिंपल की हार से सबक लेकर अखिलेश ने जीरो से शुरूआत करते हुए इस बार अपनी पार्टी के टिकट 30 साल से कम और पढ़े-लिखे युवा नौजवानों को बांटे। उनके प्रत्याशी अगर 50-55 साल के अधेड़ उम्र के व्यक्ति रहें तो वहीं 30 साल के पढ़े-लिखे भी युवा रहे। जिसका नतीजा यह हुआ पार्टी भारी बहुमत से जीत गयी। और प्रदेश में वो हुआ जो आज तक मुलायम सिंह यादव नहीं कर पाये।
इससे पहले उन्हें सत्ता सुख तीन बार नसीब हुआ लेकिन स्पष्ट बहुमत कभी नहीं मिला। हमेशा उन्होंने सरकार किसी के साथ गठजोड़ करके बनायी इसलिए इस बार उन्हें पूर्ण बहुमत मिला है, जिसके पीछे युवा खून अखिलेश का हाथ है।
मुलायम ने राहुल को टक्कर देने के लिए अपने बेटे को आगे कियाऔर उनके बेटे ने वो कर दिखाया जिसकी उम्मीद कांग्रेसी, राहुल से लगाये हुए थे। अब खुद सपाई कह रहे हैं अखिलेश की यह जीत उन्हें साल 2014 में काम आयेगी जब लोकसभा चुनाव होने वाले होंगे।
यानी कि लखनऊ की गद्दी हासिल करने के बाद सपा दिल्ली की ओर कदम बढ़ा रही है इसलिए वो अभी से बात कह रही है लेकिन वो शायद यह भूल गयी है जनता ने मुलायम पर नहीं अखिलेश पर भरोसा जताया है इसलिए सपा को सीएम की गद्दी पर बैठाना होगा, जो कि उसे यूपी में राह आसान करेगा ही वहीं साल 2014 में भी उसकी राह आसान करेगी। इसलिए अगर सपा को दिल्ली फतेह करनी है तो अखिलेश को सीएम बनाना चाहिए।












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