उत्‍तर प्रदेश में चुनाव खत्‍म होते ही बढ़ा क्राइम

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश में चुनाव खत्म होते ही अपराधी सक्रिय होने लगे हैं। अपराध के बढ़ते आंकड़े बता रहे हैं कि चुनाव के दौरान अपराधी भी अपने खेमों में आराम कर रहे थे लेकिन चुनाव प्रचार थमते ही सब बाहर आ चुके हैं। हालांकि चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुये और कहीं भी आपराधिक घटना नहीं हुई।

विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राज्य में जहां अपराधों में कमी रही वहीं चुनाव प्रचार समाप्त होते ही अपराधिक घटनाओं में बढ़ोत्तरी होना शुरू हो गयी है। पिछले एक माह में लूट व हत्या की एक दो बड़ी घटनाएं ही प्रकाश में आयी थी लेकिन पिछली 28 फरवरी को छठे चरण के मतदान के बाद अपराधों का सिलसिला शुरु हो गया।

राजधानी लखनऊ समेत अन्य जिलों में भी लूट, अपहरण और हत्याओं की वारदातें सुनायी पडऩे लगी हैं। लखनऊ के ठाकुरगंज में एक मार्च की शाम चिकन व्यापारी राजाराम तिवारी के छह वर्षीय पुत्र शुभम का अपहरण किया गया। तीन लाख रुपये की फिरौती न मिलने पर बदमाशों ने मासूम का कत्ल कर उसका शव जंगल में फेंक दिया।

बदमाशों की यह करतूत पुलिस के लिए एक चुनौती थी कि वह अपराध पर लगाम लगाने में फिसड्डी है। सूत्रों के अनुसार छठे चरण के लिए 28 फरवरी को मतदान हुआ और बस्ती मण्डल के बस्ती और सिद्धार्थनगर जिले में दो लोगों की हत्या कर दी गयी। उसी दिन बलिया जिला मुख्यालय सदर कोतवाली इलाके में एक 55 वर्ष के वृद्ध की मामूली बात पर हत्या की गयी थी।

मुजफ्फरनगर जिले के तितावी इलाके में 28 को ही डोलबंदी के बाद हुए विवाद में दो सगे भाईयों की गोली मारकर हत्या कर दी गयी। इसी जिले के काबडौत गांव में अज्ञात लोगों ने 45 साल के एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस की नाक के नीचे आपराधिक वारदातें होतीं रहीं और पुलिस कुछ नहीं कर सकी।

उधर फतेहपुर जिले के मलवां क्षेत्र में 27 फरवरी को अपना दल के प्रत्याशी के पुत्र संग्राम सिंह की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसी दिन अम्बडेकरनगर जिले के सांती क्षेत्र में अज्ञात बदमाशों ने भारतीय जनता पार्टी स्थानीय नेता विजय बहादुर ङ्क्षसह को गोली मार दी। इन आंकड़ों को तो देखकर ऐसा ही लगता है कि अपराधी चुनाव समाप्त होने का इंतजार कर रहे थे। सूत्रों की माने चुनाव ऐसा समय होता है जब राजनीतिक लोग चुनाव में व्यस्त होते हैं ऐसे में अपराधियों के लिए खतरा बढ़ जाता है क्योंकि अपराधियों को नेताओं का ही संरक्षण मिला होता तभी वे बेखौफ अपने मंसूबों को अंजाम देते रहेते हैं।

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