समलैंगिकता विवाद : सिस्टम का मजाक न बनाए केंद्र

गौरतलब है कि सु्प्रीम कोर्ट में दायर समलैंगिक संबंध मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपना रूख बदलते हुए इसे अनैतिक बताया था। न्यायाधीश जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की पीठ के समक्ष सरकार का पक्ष रखते हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि भारतीयों के सामाजिक और नैतिक मूल्य अन्य समाजों से अलग हैं और हम पश्चिमी देशों के अनुसार नहीं चल सकते। यह पीठ दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुनवाई कर रही है जिसमे उसने एक निजी स्थान पर दो समलैंगिक वयस्कों के बीच सहमति से शारीरिक संबंध बनाने को अपराध की श्रेणी से बाहर रखा था। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि केंद्र को भारतीय दंड संहिता की धारा-377 को संशोधित करना चाहिए।












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