इंडियन मुजाहिदीन का एक औऱ आतंकी गिरफ्त में

दिल्ली पुलिस ने कफिल को दिल्ली लाकर तीस हजारी कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे 6 मार्च तक की पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया। आईबी समेत तमाम खुफिया एजेंसियां कफिल से पूछताछ करने में जुटी हैं। गौरतलब है कि डीसीपी अशोक चांद व एसीपी संजीव यादव की टीम ने नवंबर में आईएम के बिहार मॉड्यूल का खुलासा कर कतील सिद्दीकी, इरशाद खान, गौहर अजीज, गयूर अहमद, अब्दुल रहमान, फारूख, तारिक समेत पाकिस्तानी नागरिक मो. आदिल को गिरफ्तार किया था। इन आतंकियों की गिरफ्तारी से जामा मस्जिद विदेशी हमला, चिन्ना स्वामी स्टेडियम ब्लास्ट तथा जर्मन बेकरी ब्लास्ट का खुलासा हुआ था। बिहार शरीफ से पकड़ा गया नालंदा निवासी तारिक अंजुम आईएम के संस्थापक सदस्यों में एक था।
सूत्रों की मानें तो कफिल की गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस के लिए काफी महत्वपूर्ण है। कफिल से पूछताछ में न सिर्फ शाहरुख उर्फ यासीन के विषय में कई महत्वपूर्ण सूचनाएं मिल सकती हैं बल्कि उन आतंकियों का पता भी मिल सकता है जो अभी तक पकड़े नहीं गए। उसके द्वारा आतंक की राह पर लाए गए कई युवाओं का नाम तक सुरक्षा एजेंसियों के पास नहीं है। अभी तक ऐसे पंद्रह नाम सामने आ चुके हैं जिन्हें कफिल ने आईएम से जोड़ा है।
वैसे जांच में सामने आया है कि कफिल का कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है। पुलिस से बचे रहने के लिए कफिल ने मदरसे के समीप साइकिल पंचर की दुकान खोल रखी थी। एक आला पुलिस अधिकारी के अनुसार आतंक की फसल सींचने व युवाओं को दिमागी रूप से इसके लिए तैयार करने का काम कफिल के जिम्मे था। कफिल ने 15 से ज्यादा आतंकियों को तैयार करने का काम किया, बल्कि अक्टूबर 2011 में फरार आतंकी शाहरुख उर्फ यासीन अहमद को अपने यहां पनाह भी दी।












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