हरियाणा में महामारी की तरह फैला हेपेटाइटिस सी

hepatitis c
फतेहाबाद। झोलाछाप डॉक्टरों की करतूत से रतिया में हेपेटाइटिस सी महामारी की तरह फैल गया है। अब तक 12 सौ से ज्यादा लोगों को इसकी पुष्टि हो चुकी है। अकेले बुधवार को 809 सैपलों में से 201 लोगों में यह पॉजीटिव पाया गया। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार रोग फैलने की सबसे बड़ी वजह आरएमपी (रेगुलर मेडिकल प्रैक्टिशनर) हैं।

पिछले तीन से पांच साल पहले इन डाक्टरों ने इलाके में कई लोगों को एक ही सिरिंजों से टीके लगाए जिससे हेपेटाइटिस सी वायरस (एससीवी)एक से दूसरे में चला गया। आज इस वायरस ने महामारी जैसा रूप ले लिया है।

पीजीआई रोहतक और अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के 24 डाक्टरों की विशेष टीम सर्वे में जुटी है। इनमें 20 डॉक्टर पीजीआई रोहतक से हैं और चार अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से। इनकी अगुवाई पीजीआई रोहतक के सामुदायिक आयुर्विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप खन्ना, सीनियर रेजिडेंट डॉ. आरबी जैन और डॉ. वरुण अरोड़ा कर रहे हैं। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक इलाके के मेडिकल प्रैक्टिशनर्स ने तीन से चार साल पहले ही डिस्पोजेबल रिंज का इस्तेमाल शुरू किया है।


हेपेटाइटिस सी वायरस के लक्षण भी पांच से लेकर 15 सालों के बाद नजर आते हैं। सर्वे के दौरान बुधवार शाम तक 4613 सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें से 1265 सैंपलों में हेपेटाइटिस सी वायरस पाजीटिव मिला। इनमें तकरीबन 65 फीसदी पुरुष हैं। कार्ड टेस्ट में अब तक करीब 30 बच्चों हेपेटाइटिस सी वायरस संक्रमित पाए गए हैं। जिन मामलों में माता-पिता दोनों पाजीटिव पाए गए सिर्फ उन्हीं घरों के बच्चों के सैंपल जांचे गए।

सर्वे मुख्य तौर पर 18 से 65 वर्ष आयुवर्ग के बीच किया जा रहा है। फिलहाल यह सभी नतीजे कार्ड टेस्ट के जरिए सामने आए हैं। अब सभी सैंपलों का पीजीआई रोहतक में एलिजा टेस्ट होगा। हालांकि कार्ड टेस्ट के नतीजे करीब 97 प्रतिशत सही ही होते हैं।

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