ट्रेन से कटकर हर साल मरते है 15,000 लोग

भारत के मशहूर वैज्ञानिक डा. अनिल काकोदकर की अध्यक्षता में तैयार की गई इस खूनी रिपोर्ट को पिछले दिनों रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को सौंपा गया। उन्होंने कहा कि रेलवे पर बोझ इतना बढ़ गया है जिसकी वजह से ट्रैफिक के नियंत्रण के लिए पैसा और समय दोनों नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि रेलवे सुरक्षा को देखते हुए एक अलग विभाग बनाने की जरूरत है।
काकोदकर ने कहा कि ऐसी घटनाए रोकने के लिए रेलवे क्रॉसिंग को खत्म करके पुलों का निर्माण किया जाए। रेलवे के पास केवल रेल दुर्घटनाओं में मारे गये लोगो का ही आकड़ा होता है, ट्रेक पर करते समय मरने वालों का आकड़ा रेलवे के पास नहीं होता। रेलवे लाइनों पर मरम्मत के दौरान रेलवे कर्मचारियों की भी बड़ी मात्रा में मौतें होती हैं।
रिपोर्ट में उन्होंने बताया है कि ट्रैकों की देखभाल करने वाले गैंगमैन, गेट बंद करने वाले गेटमैन और ड्राइवरों सहित एक लाख 24 हजार पद खाली हैं।












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