राहुल गांधी को लोग सुनने नहीं देखने आते हैं
मंच पर तो हर दूसरे नेता की तरह राहुल गांधी और उनका परिवार अपना गुणगान और दूसरों पर आरोप लगा रहा है, लेकिन चुनावी सभाओं में आये लोगों के विचार एकदम अलग दिखायी और सुनायी पड़ रहे हैं। जहां ऱाहुल की ओर से कहे शब्द विरोधी पार्टियों के लिए बहस का मुद्दा और मीडिया के लिए सुर्खियां बन रहे हैं वहीं प्रदेश की आम जनता राहुल गांधी को सुनने नहीं बल्कि देखने आती है। मीलों पैदल चलकर गांव के लोग राहुल गांधी की सभाओं में पहुंच जरूर रहे हैं, लेकिन इसके पीछे राहुल गांधी के जोरदार शब्द नहीं बल्कि वो सुंदर कदकाठी है जो उन्हें ऊपर वाले से मिली है।
गुरूवार को राहुल गांधी ने लखनऊ में रोड शो करने से पहले उससे सटे एक गांव मोरावा में जनसभा की थी। जहां कुछ लोग ऐसे थे जो 12-14 मील पैदल चल कर आये थे। जिसमें गांव के बच्चे, बूढ़े, महिलाएं और जवान शामिल थे, जब हमने उनसे प्रश्न किया कि यहां आप किस लिए आये हैं तो उनका जवाब था कि वो लोग यहां गांधी परिवार के वारिस को देखने आये हैं।
टीवी पर तो बहुत बार देखा है,सोचा सामने से कैसे लगते हैं चलकर देखते हैं। अरे सरकार कौनो की बनें, हमरा क्या, कौन सा हमारे लिए कुछ खास हो जायेगा, हमें तो बस खबर मिली तो हम चले आये। राहुल गांधी को दूर से ही देखत हैं, बहुत निक (अच्छे) लागत हैं। इनकी बहनियां भी बहुत खूबसूरत बाटिन, जैसन सिनेमा की हीरो-हरोईन होवत हैं ना, वैसन हमका लागत हैं दोनों भाई-बहिन।
इसी बीच एक लड़के ने जिसकी उम्र 12-13 साल होगी उसने कहा कि राहुल गांधी जब मंच पर आस्तिन चढ़ा-चढ़ा कर गुस्सा-गुस्सा कर बोलते हैं ना हमें एकदम दबंग वाले सलमान खान की तरह लगते हैं। वो भी गु्स्से में आस्तिन चढ़ा कर फिल्म मे बोलता था। यह तो एक गांव का नजारा था।
अब बात करते हैं शान-ए-अवध यानी की लखनऊ की। जहां ऱाहुल गांधी ने रोड शो किया। जिसे देखने के लिए भारी जनता उमड़ी थी। एक मेडिकल कोचिंग में पढ़ने वाले यंगस्टर ने कल अपनी कोचिंग संस्थान की छुट्टी करा दी थी वजह थी कोचिंग में पढ़ने वाले छात्र-छात्रा राहुलगांधी को एक नजर देखना चाहते थे इसलिए उन्होंने गुरूवार को अपने कोचिंग सेंटर को बंद करा दिया।
जब हमने कोचिंग सेंटर के विधार्थियों से इसका कारण पूछा तो उनका जवाब था कि अरे अभी राहुल गांधी लखनऊ में आ रहे हैं क्योंकि चुनाव होने हैं। एक बार चुनाव हो जायेंगे तो कौन आता है,हम देखना चाहते थे कि हैंडसम और डैंशिंग लुक वाला यह बंदा सामने से कैसा लगता है? इसलिए हमने आज छुट्टी करवा दी और राहुल गांधी को देखने के लिए चले आये। अच्छा है यह उनका रोड शो है, मतलब की फालतू की भाषणबाजी हमें सुनने को नहीं मिलेगी। वैसे भी नेताओं की बकवास कौन सुनें। हम तो बस राहुल को देखने आये हैं।
कुल मिलाकर कहने का मतलब यही है कि चाहें निरक्षर हो या साक्षर हर कोई राहुल गांधी को एक चार्मिंग पर्सनालिटी के रूप में देख रहा है ना कि एक राजनेता के रूप में। जिस चीज के लिए वो कोशिश कर रहे हैं उस ओर किसी क दिमाग नही जा रहा है बल्कि लोग उन्हें किसी फिल्मी किरदार की तरह निहार रहे हैं। जबकि यूपी चुनाव किसी फिल्म की कहानी नहीं जो तीन घंटे बाद खत्म हो जायेगी बल्कि यह तो सत्ता की वो जंग है जहां जो जीतेगा उसे राज करने का मौका तो मिलेगा ही बल्कि उसके कंधों पर जनता की भारी जिम्मेदारी भी होगी।
खैर यह तो एक तस्वीर है जो सामने हैं, दूसरी तस्वीर तो 6 मार्च को दिखेगी जब चुनावी नतीजे आयेंगे जिससे पता चलेगा कि राहुल गांधी का जादू कांग्रेस को कितनी सीटें दिला पाता है। अगर कांग्रेस को 22 से ज्यादा सीटें मिलती हैं तब तो कहा जायेगा कि चार्मिंग बॉय एक युवा नेता बन गया वरना चार्मिंग बॉय को लोग केवल चॉकलेटी स्टार ही कहेंगे जो केवल देखने में ही अच्छा लगता है।













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