यूपी चुनाव में अहम भूमिका निभा रही हैं मल्टीनेशलन कंपनियां
इन अधिकारियों का कहना है कि वे छुट्टी लेकर यहां काम कर रहे हैं चुनाव बाद वे वापस अपने काम पर लौट जायेंगे। भाजपा व कांग्रेस का चुनाव ऑफिस दिल्ली में बनाया गया है लेकिन कुछ अधिकारी यहां भी काम कर रहे हैं जो की पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं से लगातार सम्पर्क बनाए हुए हैं। इन अधिकारियों का मुख्य काम पार्टी के प्रचार को बेहतर करना तथा चुनाव सामग्री से लेकर वरिष्ठ नेताओं के कार्यक्रमों को अंतिम रूप देना है। यह अधिकारी चुनाव आयोग से मिलने वाली हिदायत का पालन कराना भी सुनिश्चित कराते हैं इसके साथ ही यदि चुनाव आयोग से कोई स्पष्टीकरण मांगा जाता है तो उसका जवाब भी यही अधिकारी तैयार करते हैं।
इसके अलावा इन अधिकारियों की जिम्मेदारी विरोधी पार्टियों के उम्मीदवारों के द्वारा चुनाव आचार संहिता का यदि उल्लघंन किया जाता है तो उसकी शिकायत भी यही अधिकारी चुनाव आयोग से करते हैं। इस तरह समूची चुनाव प्रक्रिया को राजनीतिक नेताओं ने इन विशेषज्ञों को सौंप रखी है। सपा के कार्यालय में इसके लिए वार रूम बनाया गया है जो कि सीधे अखिलेश यादव के निर्देशन में काम कर रहा है। यह वार रूम लगातार 24 घण्टे काम कर रहा है और यहां पर इन अधिकारियों के लिए विशेष व्यवस्था की गयी है।
यह अधिकारी भी लगातार समूची चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं। इसी तरह कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी के निर्देशन में भी दिल्ली व लखनऊ में विशेष व्यवस्था की गयी है जहां पर एक टीम लगातार पूरी चुनाव प्रक्रिया पर नजर रख रही है। बहुजन समाज पार्टी के अंदर इस तरह के किसी वार रूम को नहीं देखा गया लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री मायावती समूची चुनाव प्रक्रिया पर व्यक्तिगत रूप से कड़ी नजर रख रही हैं और उनकी रणनीति के अनुसार पार्टी के लोग लगातार काम कर रहे हैं।
इसके पहले भी चुनाव में रणनीति बनाने से लेकर चुनाव प्रचार पर नजर रखने के लिए विशेषज्ञों की पूरी टीम रखी जाती थी। भाजपा में इस परम्परा की शुरुआत प्रमोद महाजन ने शुरू की थी तो कांग्रेस में इसे महासचिव राहुल गांधी ने शुरू किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश भी इस टीम से जुड़े रहते हैं लेकिन इस बार की तैयारी में राहुल गांधी ने बिल्कुल नयी टीम लगायी है जो की दिल्ली से उनके साथ लगातार सम्पर्क में लगी हुई है। राहुल गांधी व अखिलेश यादव के द्वारा इस तरह की रणनीति की चर्चा करते हुए एक राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि इसके पहले भी पार्टियां अपनी चुनाव रणनीति को सफल बनाने के लिए जानकार लोगों की मदद लिया करती थीं।
उस समय भी पार्टियों में ऐसे लोग हुआ करते थे जिनके पास देशभर के विभिन्न चुनाव क्षेत्रों की पूरी जानकारी हुआ करती थी। किस चुनाव क्षेत्र में किस जाति या धर्म के लोगों की प्रमुखता है इसकी पूरी जानकारी वे रखते थे उसी के आधार पर टिकट बांटने से लेकर प्रचार को अंतिम रूप दिया जाता था। अब स्थिति बदल गयी है सब कुछ कम्प्यूटर व इंटरनेट के माध्यम से इसे तैयार किया जाता है और पार्टी के नेता लगातार सम्पर्क में बने रहते हैं। ऐसे रणनीतिकारों की पहले भी मांग हुआ करती थी और अब भी उनकी जरूरत पड़ती है। हर पार्टियां ऐसे लोगों की मदद लेती हैं।
यहां तक की बड़े नेता जिन चुनाव क्षेत्रों से चुनाव लड़ते हैं उनकी अपनी अलग टीम होती है जो की लगातार जनता से सम्पर्क बनाने का काम करती है। भारतीय राजनीति में इस परम्परा का पहले की अपेक्षा अब ज्यादा उपयोग किया जा रहा है इसलिए हम कह सकते हैं कि भारतीय राजनीति भी धीरे-धीरे हाईटेक होती जा रही है। चुनाव आयोग भी लगातार अपने को हाईटेक करता जा रहा है उसी तरह पार्टियों को भी अपने को हाईटेक करना पड़ रहा है।













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