रूस में फिर गीता पर प्रतिबंध की लड़ाई शुरू
मास्को।
रूस में हिंदू धर्म ग्रंथ को (चरमपंथी साहित्य) बताए जाने और उसे प्रतिबंधित करने के प्रयासों के खिलाफ कानूनी लड़ाई एक बार फिर गरमाती नजर आ रही है। सरकारी अभियोजकों ने दो महिने पहले आए फैसले को अदालत में चुनौती दी है। सरकारी अभियोजक अपनी अपील दायर कर चुके हैं, न्यायालय इसपर छह मार्च को सुनवाई करेंगा। id="toptextpromo">गौरतलब
है कि कुछ महिने पहले साइबेरिया में भगवत गीता पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर उठे विवाद पर दुख जताते हुए रूस ने कहा था कि इस पवित्र ग्रंथ को अदालत में घसीटा जाना नितांत अस्वीकार्य है। भारत स्थित रूसी राजदूत अलक्सांद्र एम कदाकिन ने यहां एक बयान में कहा था कि यह बहुत दुखद है कि इस तरह की घटना साइबेरिया के इस खूबसूरत विश्वविद्यालय शहर तोम्स्क में हुई है। id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'> id='top-searched-articles'>तोम्स्क
अपनी धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक सहिष्णुता के लिए पूरे विश्व में विख्यात है। उन्होंने कहा कि अब ऐसा लगता है कि खूबसूरत तोम्स्क शहर में भी कुछ उन्मादी लोग बस गए हैं। उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह स्पष्ट रूप से अस्वीकार्य है कि किसी भी पवित्र ग्रंथ को अदालत में घसीटा जाए। सभी आस्थावानों के लिए ये ग्रंथ बेहद पवित्र होते है।











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