नेताओं की बयानबाजी से बढ़ी भाजपा की मुश्किलें
भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ ने चुनाव के बाद त्रिशंकु विधानसभा आने तथा अपनी पार्टी से सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को समर्थन नहीं देने की बात कहकर भाजपा के समक्ष एक और मुसीबत खड़ी कर दी है। उन्होंने कहा कि वह मानते हैं कि भाजपा के अलावा कांग्रेस ने भी किसी को समर्थन दिया तो दोनों का अस्तित्व राज्य से समाप्त हो जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि विधानसभा त्रिशंकु आएगी और एक साल में फिर से चुनाव होंगे। उनका दावा है कि किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलेगा। मिलीजुली सरकार बनेगी जो वर्ष भर में गिर जाएगी।
इन कयासों के साथ ही उन्होंने यह तक कह डाला कि वह चाहते हैं कि भाजपा की सरकार नहीं बनने पर पार्टी विपक्ष में बैठे और अपने संगठन को मजबूत करने में पूरा ध्यान केन्द्रित करे। योगी के इस बयान से भाजपा की मुश्किलें कितनी बढ़ सकती है यह इसी से जाहिर है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने योगी आदित्यनाथ के त्रिशंकु विधानसभा आने और एक साल में फिर से चुनाव संबंधी बयान पर नाखुशी जताई और कहा है कि उनका बयान वह ही जानें। श्री शाही देवरिया जिले की पथरदेवा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि योगीजी के बयान के बारे में वह कुछ नहीं कह सकते। उन्होंने बयान क्यों और किन परिस्थितियों में दिया है, मैं इस पर कुछ नहीं कह सकता लेकिन पार्टी में सभी को अनुशासित और संयमित रहना चाहिए। श्री शाही ने कहा कि भाजपा के प्रति मतदाताओं का रूख सकारात्मक है और पार्टी सरकार बनायेगी। वहीं भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने भी राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का दावा किया था हालांकि उन्होने यह भी कहा था कि बहुमत नहीं मिलने पर भाजपा किसी को समर्थन देने के बजाय पार्टी विपक्ष में बैठेगी।
पार्टी सूत्रों की मानें तो मायावती के खास रहे पूर्व मंत्री बाबू ङ्क्षसह कुशवाहा को भाजपा में शामिल किये जाने और टिकट बंटवारे को लेकर योगी आदित्यनाथ पार्टी से नाराज चल रहे थे। उनके इस ताजा बयान से यह माना जा रहा है कि उनकी नाराजगी अभी भी बरकरार है।













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