बैंगलोर में नार्थइंडियन के लिए मस्त है 'मस्तकलंदर'

बैंगलुरू। आईटी सिटी बैंगलोर में करीब 40 प्रतिशत लोग देश के विभिन्न क्षेत्रों से आकर नौकरी कर रहे हैं। जिनमें से उत्तर भारतीयों की तादात बहुत ज्यादा है। जिनकी समस्या सबसे ज्यादा यहां के भोजन को लेकर है। लोग दक्षिण भारतीय खाने को पंसद तो बहुत करते हैं लेकिन उसे रोज-रोज खाने में उन्हें ज्यादा आनंद नहीं आता है क्योंकि इसे पचाने में लोगों को खासी दिक्कत होती है।

लेकिन सदाबहार मौसम के लिए जाने जाना वाला बैंगलोर मु्द्रा के दृष्टिकोण से भी अच्छा-खासा महंगा है इसलिए आईटी में काम करने वाले खासकर युवागण जिनकी महीने की तनख्वाह करीब 15000-30000 के बीच में हैं, वो रोज यहां के बड़े रेस्तरां या होटलों का खर्चा नहीं उठा सकते हैं। इसलिए ऐसे लोगों के लिए अगर कोई वरदान है तो वो हैं बैंगलोर का 'मस्तकलंदर रेस्टोरेंट'। जहां आपको हर उत्तर भारतीय शाकाहारी डिश मिलती है वो भी आपके पॉकेट के मुताबिक। जिसके लिए आपको सोचना नहीं पड़ता है।

आपको जानकर हैरत होगी कि बैंगलोर में रह रहे नार्थ इंडियन के लिए वरदान बनें 'मस्तकलंदर' को खोलने वाले दो आईटी के पुरोधा ही है, जिन्होंने आईटी की अच्छी खासी नौकरी छोड़ कर इस कारोबार में कदम रखा और देखते ही देखते लोगों के लिए एक मिसाल बन गये। इन दोनों पुरोधाओं का नाम है पल्लवी गुप्ता और उनके पति गौरव जैन।

जो अच्छी खासी आईटी की जानी-मानी कंपनी वीप्रो में काम कर रहे थे। एक दिन अचानक ही दोनों ने विप्रो से अपनी-अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया और मेकडॉनल्ड्स का भारतीय संस्करण शुरू करने की ठानी। उन्होंने अपने साथ के युवाओं की कमजोरी को समझते हुए 'मस्तकलंदर रेस्तरां' की शुरूआत की।

साल 2005 में शुरूआत के बाद आज उनके बैंगलोर में 18 और एक चेन्नई और 2 हैदराबाद में रेस्टोरेंट हैं। इसके अलावा बैंगलोर में दो और आउटलेट खोलने की तैयारी है। वे भारत के हर छोटे-बडे शहर में अपने रेस्तरां खोलना चाहते हैं।

दोनों ही पति-पत्नी का मानना है कि इंसान पैसे खाने के लिए कमाता है अगर पैसे कमाने के बाद भी उसे पेट भर और मन भर खाना ना मिले तो उसकी कमाई किस काम की। मस्तकलंदर हमने इसलिए शुऱू किया ताकी लोगों को उनका खाना उनकी जेब के हिसाब से मिले और खाना खाने के बाद उन्हें अपना घर याद आये। और हमें खुशी है कि हम यह करने में कामयाब भी रहे। दो कामयाब आईटी इंजीनियर की इसी कामयाबी के चलते इन्हें फोर्बस मैंगजिन में भी जगह मिली है। कहना गलत ना होगा बैंगलोर का मस्तकलंदर आज लोगों के लिए मिसाल बन चुका है।

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