गुणवत्तापूर्ण शुक्राणु उत्पादन काफी महंगा

पीएलओज वन पत्रिका के अनुसार, एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने पाया है कि शुक्राणु उत्पादन पूर्व की सोच के विपरीत जैविक रूप से अधिक महंगा साबित होता है और इस पर खर्च होने वाली उर्जा से स्वास्थ्य संबंधी कई जटिलताएं पैदा होती हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अध्ययन में आस्ट्रेलियाई झुंगीर टेलियोग्रिलस ओशनिकस में शुक्राणु गुणवत्ता और प्रतिरोधक क्षमता के बीच संबंध की जांच की।
उन्होंने यह अध्ययन यह साबित करने के लिए किया कि शुक्राणु की गुणवत्ता काफी कीमती है और नर जैविक प्रक्रिया में अपनी उर्जा खर्च करने को लेकर कूटनीतिक भी होते हैं। उन्होंने कहा कि नर झुंगीर जब अपरिपक्व या परिवक्व मादा से संयोग करता है तो उस समय उसके उच्च गुणवत्ता वाले अधिक शुक्राणु पैदा करने की संभावना होती है।
यह उर्जा के कूटनीतिक निवेश का संकेत है। टीम का नेतृत्व करने वाले मोनाश यूनिवर्सिटी के डैमियन डाउलिंग ने कहा कि खास तौर पर यह माना जाता रहा है कि प्रजनन के दौरान मादा को काफी उर्जा खर्च करनी होती है। जबकि नर बहुत कम उर्जा के साथ तुरंत उच्च गुणवत्ता के लाखों सूक्ष्म शुक्राणु पैदा कर सकता है।
टीम ने यह भी पाया कि झुंगीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर गुणवत्तापूर्ण शुक्राणु उत्पादन का नकारात्मक असर पड़ता है। डा. डाउलिंग ने कहा कि जिन नर की शुक्राणु उत्पादन में अधिक उर्जा खर्च हुई, उनके जीवाणु संक्रमण से मरने की अधिक संभावना थी। हम इस बारे में बात कर रहे हैं कि किस तरह शुक्राण उत्पादन में उर्जा के अधिक व्यय से प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है।












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