पत्नियों को विधानसभा पहुंचाने में जुटे सांसद
यूपी में कम से कम दस प्रतिशत सांसद ऐसे है जिन्होंने पत्नियों को मैदान में उतारा है। इनमें केन्द्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद का नाम सबसे पहले लिया जा सकता है। सलमान खुर्शीद फर्रुखाबाद से सांसद हैं और अपनी पत्नी लुईस खुर्शीद को फर्रुखाबाद जिले की एक सीट से विधानसभा पहुंचाने की फिराक में हैं। श्रीमती खुर्शीद सन् 2007 के चुनाव में हार गयी थीं लेकिन 2002 में वह जीतकर विधानसभा पहुंचने में कामयाब रही थीं।
सुलतानपुर के सांसद संजय सिंह अपनी पत्नी अमिता सिंह को अमेठी से दोबारा विधायक बनाने के लिए प्रयासरत हैं। कांग्रेस के टिकट पर श्रीमति सिंह चुनाव लड़ रही हैं। बहराइच से कांग्रेस के ही सांसद कमांडो कमल किशोर श्रावस्ती सीट से अपनी पत्नी पूनम किशोर को चुनाव लड़ा रहे हैं।
बरेली से कांग्रेस सांसद प्रवीण सिंह ऐरन अपनी पत्नी सुप्रिया ऐरन को बरेली से लड़वा रहे हैं। श्रीमती ऐरन बरेली की महापौर भी है। जौनपुर से बहुचर्चित सांसद धनंजय सिंह ने अपनी पत्नी जागृति सिंह को निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतार दिया है। धनंजय सिंह एक मामले में जेल में हैं। बसपा सांसद बृजेश पाठक अपनी पत्नी नमृता पाठक को उन्नाव जिले की सदर सीट से विधानसभा पहुंचाने की कोशिश में लगे हुए हैं।
आजमगढ़ से भारतीय जनता पार्टी के बाहुबली सांसद रमाकान्त यादव अपनी पत्नी रंजना यादव को भाजपा के टिकट पर आजमगढ़ सदर सीट से चुनाव लड़ा रहे हैं जबकि अमरोहा से राष्ट्रीय लोकदल के सांसद देवेन्द्र नागपाल की पत्नी अंजू नागपाल नौगहा सादात विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में है। कुल मिलाकर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटे है जिसमें कम से कम आठ सांसदों ने अपनी पत्नी को राज्य विधानसभा पहुंचाने के लिए ऐडी चोटी का जोर लगा रखा है।













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