यूपी में मुस्लिम वोट पाने के लिये पार्टियों के बीच घमासान

धर्म आधारित आरक्षण का मुखर विरोधी रही भाजपा अपने प्रतिद्वंद्वियों के बीच इस प्रतिस्पर्धा का उपयोग अन्य पिछड़ा वर्ग में गुस्सा पैदा करने के लिए कर रही है। वह इस बात को पेश कर रही है कि ओबीसी के हिस्से से अल्पसंख्यकों को उपकोटा देने से उनके हिस्से में कटौती होगी। हास्यास्पद बात है कि उपकोटा को लेकर यह संघर्ष कांग्रेस ने शुरू किया है, जो मंडल और कमंडल की राजनीति के उभार के बाद दो दशक पहले प्रदेश की राजनीति में हाशिए पर चली गई थी।
उत्तर प्रदेश के जाने-माने नेताओं में से एक केंद्रीय विधि मंत्री सलमान खुर्शीद ने हाल में कहा था कि अगर कांग्रेस राज्य में सत्ता में आई तो वह राज्य के पिछड़े मुसलमानों को नौ फीसदी आरक्षण देगी। कांग्रेस उनके साथ दृढ़ता से खड़ी रही थी। राजनैतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस ने कांग्रेस की दयनीयता बढ़ाई।
मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी ने इससे एक कदम और आगे बढ़ते हुए अपने चुनाव घोषणा पत्र में मुस्लिमों को उनकी आबादी के हिसाब से नौकरियों में 18 फीसदी आरक्षण देने का वादा किया है। पार्टी घोषणा पत्र में हालांकि इसका विवरण नहीं दिया गया है। सपा के चुनाव घोषणा पत्र में सच्चर समिति की अनुशंसाओं को भी लागू करने का वादा किया गया है। उसने देश में मुस्लिमों की खराब दशा का अध्ययन किया था।












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