भाजपा को कुशवाहा के सहारे जातीय समीकरण साधने की आस: कलराज

Kalraj MIshra
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) में हुए घोटाले के आरोपी पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को दल में शामिल करने को लेकर उठे विवाद से बेपरवाह भारतीय जनता पार्टी यह महसूस करती है कि कुशवाहा का समर्थन मिलने से राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव में विरोधी दलों के समीकरणों पर असर पड़ेगा। भाजपा के राष्टीय उपाध्यक्ष कलराज मिश्र ने कहा कि कुशवाहा को दल में शामिल करने को लेकर उठे विवाद को छोड़ दिया जाए, अभी वह पार्टी के सदस्य नहीं हैं, क्योंकि उनकी पार्टी सदस्यता को फिलहाल स्थगित रखा गया है।

हालांकि उनके समर्थन से भाजपा को मदद मिल रही है और अपनी बिरादरी में खासा प्रभाव रखने वाले कुशवाहा की वजह से पिछड़े वर्ग के मतदाताओं का पार्टी की तरफ रुझान बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कुशवाहा के समर्थन की वजह से ना सिर्फ बुंदेलखण्ड में बल्कि राज्य के दूसरे भागों में भी भाजपा को पिछड़े वर्ग के मतदाताओं का समर्थन मिल रहा है। चुनाव सभाओं के दौरान वे हमारे पास आते हैं और अपना समर्थन व्यक्त करते हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में एनआरएचएम घोटाले के प्रमुख आरोपी पूर्व परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने बसपा द्वारा ठुकराए जाने के बाद गत तीन जनवरी को नयी दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी जिसके बाद पार्टी के ही कुछ नेताओं ने इसका मुखर विरोध किया था।

मिश्र ने कुशवाहा द्वारा भाजपा में शामिल होने के लिये पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को धन दिये जाने के विरोधी दलों के आरोपों को कपोल कल्पित और बेदम बताया। विवाद बढ़ने पर कुशवाहा ने पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को पत्र लिखकर दल की सदस्यता फिलहाल स्थगित करने की गुजारिश की थी जिसे स्वीकार कर लिया गया था। अब वह राष्‍ट्रीय अधिकार मंच के बैनर तले सभाएं करके भाजपा के पक्ष में वोट मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों को अन्य पिछड़ा वर्ग के कोटे से ही काटकर साढ़े चार प्रतिशत आरक्षण दिये जाने के बाद कुशवाहा ने भाजपा से सम्पर्क करके केन्द्र के इस कदम के खिलाफ पार्टी का समर्थन मांगा था।

तीन दशक से ज्यादा के अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार लखनउ पूर्वी सीट से चुनाव लड़ने जा रहे मिश्र ने अपने जैसे वरिष्ठ पार्टी नेताओं को चुनाव में उतारने के औचित्य के बारे में पूछे गये सवाल पर कहा कि ऐसा इसलिये किया गया है ताकि लोगों में भाजपा के प्रति विश्वास और मजबूत हो। उन्होंने कहा उमा भारती, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी, केसरी नाथ त्रिपाठी जैसे वरिष्ठ नेता चुनाव मैदान में हैं। ऐसा जनता के बीच विश्वास पैदा करने और यह संदेश देने के लिये किया गया है कि भाजपा विधानसभा चुनाव को बहुत गम्भीरता से ले रही है और वह अपने बलबूते सरकार बना सकती है।

भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार सम्बन्धी विवादास्पद मुद्दे पर पार्टी उपाध्यक्ष ने कहा कि दल इस वक्त सिर्फ चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करने पर ध्यान केन्द्रित कर रहा है। जरूरत पड़ने पर पार्टी का संसदीय बोर्ड मुख्यमंत्री बनाने के मुद्दे पर निर्णय करेगा। कांग्रेस द्वारा पार्टी महासचिव राहुल गांधी के रूप में और समाजवादी पार्टी द्वारा दल के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव की शक्ल में युवाओं को तरजीह दिये जाने के सवाल पर मिश्र ने कहा कि भाजपा ने अपने युवा संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हरीश द्विवेदी समेत अनेक युवाओं को चुनाव का टिकट दिया है। मिश्र ने कहा कि उनकी पार्टी अपनी वर्तमान स्थिति और भविष्य की रणनीति से भलीभांति अवगत है। उन्होंने कहा हमारी पार्टी वंशवाद की राजनीति नहीं करती। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के भी बेटे-बेटियां हैं लेकिन वे पार्टी के सामान्य कार्यकर्ता की ही तरह हैं।

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह को पार्टी के राज्य महासचिव पद पर प्रोन्नत किये जाने को लेकर पैदा हुए विवाद के बारे में मिश्र ने कहा कि पंकज पार्टी के लिये कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हाल में जारी पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र में राम मंदिर मुद्दे को शामिल किये जाने सम्बन्धी सवाल पर उन्होंने कहा भाजपा ने इस मुद्दे को अभी छोड़ा नहीं है। वह पार्टी का नहीं बल्कि राष्‍ट्रीय मुद्दा है। चाहे हम सत्ता में रहें या ना रहें लेकिन अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिये आमराय बनाने की कोशिश करते रहेंगे।

कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश में तूफानी प्रचार अभियान के बारे में भाजपा नेता ने कहा कि राहुल सिर्फ वही बात कहते हैं जो उनके पिछलग्गू उन्हें बताते हैं। उन्होंने कहा मैं राहुल से पूछना चाहता हूं कि वह भाजपा को तो कुशासन का दोष देते हैं लेकिन कांग्रेस के बारे में क्यों नहीं बोलते जिसने राज्य में सबसे ज्यादा समय तक शासन किया है। उनके पिता राजीव गांधी कहते थे कि सरकार द्वारा विकास के लिये भेजे गये एक रुपए में से सिर्फ 15 पैसा ही आम आदमी तक पहुंच पाता है। कांग्रेस के शासन में वे 85 पैसे आखिर कहां जाते थे।

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