न्यूजीलैंड में फरमान- अंग्रेजी सीखनी हो तो संस्कृत सीखें

Sanskrit
दिल्ली (ब्यूरो)। भले ही भारत में संस्कृत का महत्व नहीं समझा जाता , लेकिन न्यूजीलैंड के एक स्कूल में दुनिया के इस महान भाषा को सम्मान मिल रहा है। न्यूजीलैंड के इस स्कूल में बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के लिए संस्कृत पढ़ाई जा रही है। फिकिनो नामक इस स्कूल का दावा है कि संस्कृत से बच्चों में सीखने की झमता काफी बढ़ जाती है। न्यूजीलैंड के शहर आकलैंड के माउंट इडेन इलाके में स्थित इस स्कूल में लड़के और लड़कियां दोनों को शिक्षा दी जाती है। 16 साल तक की उम्र तक यहां बच्चों को शिक्षा दी जाती है। इस स्कूल का दावा है कि इसकी पढ़ाई मानव मूल्यों, मानवता और आदर्शों पर आधारित है। अमेरिका के हिंदू नेता राजन जेड ने पाठ्यक्रम में संस्कृत को शामिल करने पर फिकिनो की तारीफ की है।

फिकिनो में अत्याधुनिक साउंड सिस्टम लगाया गया है। जिससे बच्चों को कुछ भी सीखने में आसानी रहती है। स्कूल के प्रिंसिपल पीटर क्राम्पटन कहते हैं कि 1997 में स्थापित इस स्कूल में नए तरह के विषय रखे गए हैं। जैसे दिमाग के लिख भोजन, शरीर के लिए भोजन, अध्यात्म के लिए भोजन। इस स्कूल में अंग्रेजी, इतिहास, मैथ और नेचर विषयों की भी पढ़ाई कराई जाती है। पीटर क्राम्पटन कहते हैं संस्कृत ही एक मात्र ऐसी भाषा है जो व्याकरण और उच्चारण के लिहाज से परफेक्ट है। उनके मुताबिक संस्कृत के जरिए बच्चों में बेहतर अंग्रेजी सीखने का आधार मिल जाता है। संस्कृत से बच्चों में बेहतर अंग्रेजी बोलने, समझने की क्षमता विकसित होती है। पीटर क्राम्पटन कहते हैं कि दुनिया की कोई भी भाषा सीखने के लिए संस्कृत भाषा आधार का काम करती है। इस स्कूल के बच्चे संस्कृत पढ़ कर बहुत खुश हैं। इस स्कूल में दो चरणों में शिक्षा दी जाती है। पहले चरण में दस साल उम्र तक के बच्चे और दूसरे चरण 16 वर्ष तक उम्र के बच्चों को शिक्षा दी जाती है।

पीटर क्राम्पटन कहते हैं इस स्कूल में बच्चों को दाखिला दिलानेवाला हर पैरेंट का यह सवाल जरुर होता है कि आप संस्कृत क्यों पढ़ाते हैं। हम उन्हें बताते हैं कि यह भाषा श्रेष्ठ है। दुनिया की महानतम रचनाएं इसी भाषा में लिखी गई हैं। अमेरिका के हिंदू नेता राजन जेड ने कहा है कि संस्कृत को सही मुकाम दिलाने की जरूरत है। उन्होंने भारत सरकार की आलोचना की और कहा कि भारत सरकार इस भाषा को बढ़ावा देने के लिए कुछ नहीं कर रही है। कहा हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध और जैन धर्म के तमाम ग्रंथ संस्कृत में लिखे गए हैं। उन्होंने गांधीजी का जिक्र किया। गांधीजी ने कहा था कि बिना संस्कृत सीखे कोई विद्वान नहीं हो सकता।

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