देश को फिर से लगा कुष्‍ठ रोग

Leprosy
दिल्ली (ब्यूरो)। 1985 में भारत में कुष्ठ रोगियों की संख्या पचास लाख थी। 2009 में यह घट कर दो लाख पहुंच गई। उसके बाद से इसमें कमी आती गई। सारी दुनिया में भारत की वाहवाही हुई। लेकिन जिस कुष्ठ रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए महात्मा गांधी ने कसम खाई थी वह रोग एक बार फिर फैलने लगा है। वैसे अभी भी सबसे ज्यादा कुष्ठ रोगी हमारे देश में ही हैं। 2005 में कागजों में समाप्त हुए कुष्ठ रोग देश में अभी भी तेजी से फैल रहा है। खासकर मलिन इलाकों में पीड़ितों की काफी संख्या सामने आ रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी भी यह मान रहे हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के लक्ष्य से ज्यादा देश के 209 जिलों में कुष्ठ रोग के नए मामले सामने आए हैं। इसकी गंभीरता को देखते हुए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर कुष्ठ रोग के अध्ययन को लेकर नई तैयारी में जुटी हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की पांचवीं समीक्षा रिपोर्ट में यह कहा गया है कि जिन राज्यों में कुष्ठ रोग को लगभग समाप्त करने का दावा किया गया था उन राज्यों से अभी भी मामले बढ़ने की रिपोर्टें आ रही हैं।

साथ ही बीमारी को बढ़ाने वाले वायरस और बैक्टीरिया के संचरण तेजी से हो रहे हैं। कुष्ठ रोगियों की बढ़ती संख्या में चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, झारखंड समेत 16 राज्य ऐसे हैं जहां तीन फीसदी से ज्यादा लोग इस बीमारी की चपेट में हैं।

आंध्रप्रदेश, असम और उड़ीसा में कुष्ठ रोग उन्मूलन का लक्ष्य लगभग हासिल कर लिया गया था, लेकिन अभी भी इन राज्यों में कुष्ठ रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आंध्रप्रदेश में कुष्ठ रोगियों की संख्या में 14.7 फीसदी बच्चों की भागीदारी है। उत्तर प्रदेश के 45 जिलों के 200 प्रखंडों में कुष्ठ रोग का फैलाव तेजी से हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में वर्ष 2008 से 2010 तक औसतन 27 हजार नए लोग इस बीमारी के चपेट में आए हैं। अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक साल एक लाख 34 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। दिल्ली के दो, उत्तराखंड के एक बिहार के 38, उड़ीसा के 22, महाराष्ट्र के 21, झारखंड के 18, छत्तीसगढ़ के 12, असम के चार, मध्य प्रदेश के 11, गुजरात के नौ जिले भी शामिल हैं। दूसरे स्थान पर बिहार है जहां औसतन 21 हजार नए मामले सामने आए हैं। जम्मू कश्मीर जैसे राज्य में पहले कुष्ठ रोगी नहीं मिलते थे, लेकिन अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2010 में 211 मरीज सामने आए।

उन्मूलन के करीब पहुंच चुकी बीमारी का तेजी के साथ फैलना सरकार की लापरवाही दर्शाती है। कुष्ठ रोग उन्मूलन के गुडविल एम्बसेडर योही सासाकावा पिछले साल भारत यात्रा के दौरान राज्यों में कुष्ठ रोग उन्मूलन से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों की लगातार घटती संख्या पर चिंता जाहिर करते हुए इस ओर ध्यान देने के लिए केंद्र सरकार से कहा था। अब केंद्र सरकार की नींद टूटी है। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. वी.एम. कटौच का कहना है कि देश के कई हिस्सों से नए मामले सामने आ रहे हैं। वर्ष 2005 तक मात्र दो लाख मरीज कुष्ठ रोग के थे। बचे हुए मरीज के कारण ही नए मामले सामने आ रहे हैं।

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