यूपी चुनाव में मौज काट रहे हैं दलबदलू नेता
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में मिली अप्रत्याशित सफलता के बाद लागातार पार्टी संगठन को तरजीह देने की बात कहने वाले कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने अपने मिशन 2012 की सफलता के लिये दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को लगे लगाने में कोई हिचक नहीं दिखाई। आपको बताते चलें कि इस विधानसभा चुनाव में पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) से आए फाखिर सिद्दीकी, समाजवादी पार्टी (एसपी) के अरविंद गिरि, सय्यूब अली, दिलीप वर्मा, अरुण कुमार सिंह, आशिक अली और हरिशंकर यादव जैसे 160 दलबदलुओं को टिकट दिया है।
कांग्रेस के बाद भाजपा दलबदुलओं को टिकट देने में दूसरे स्थान पर है। लबे समय से सत्ता के लिये संर्घष कर रही भाजपा ने 68 दलबदुलओं को टिकट दिया है। इस लिस्ट में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सरकार के मंत्री रहे अवधेश वर्मा, बादशाह सिंह, दद्दन मिश्रा के अलावा राज लक्ष्मी वर्मा, रमेश मौर्या और दल बहादुर कोरी जैसे नाम शामिल हैं।
विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रही समाजवादी पार्टी (एसपी) ने एक दर्जन दलबदलुओं को टिकट दिया है, जिसमें गुड्डू पंडित, राजपाल त्यागी, फरीद महमूद किदवई, नितिन अग्रवाल और सुखसागर मिश्रा बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के वर्तमान विधायकों के साथ मुकेश शर्मा जैसे नेता हैं। कांग्रेस छोड़कर आए चौधरी यशपाल सिंह और राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) छोड़कर एसपी में आई अनुराधा चौधरी को पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और महासिचव नियुक्त किया है। इनके अलावा रशीद मसूद ने भी एसपी का दामन छोड़ कांग्रेस का हाथ थामा और उन्हें राष्ट्रीय कार्यसमिति का सदस्य नियुक्त कर दिया।
मालूम हो कि सत्तारूढ़ बसपा ने औरों की तुलना में अपने संगठन और कार्यकर्ताओं पर ज्यादा भरोसा दिखाया है और केवल 6 बाहरी उम्मीदवारों को टिकट दिया है। इनमें एसपी विधायक संदीप अग्रवाल, सुल्तान अहमद, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नीरज गंगवार जैसे नेता शामिल हैं।













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