झुक रही है ताज महल की एक मीनार

हालांकि सुप्रीम कोर्ट में एएसआई की ओर अधिवक्ता एडीएन राव ने हलफनामे में दक्षिण-पश्चिमी मीनार के बढ़ते झुकाव को छोड़कर ताज का अस्तित्व पूरी तरह से सुरक्षित होने का दावा किया है। रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि हाल ही में मीनारों के झुकने के संबंध में हुई कवायदों में जो नतीजा सामने आया है उसमें यह पाया गया है कि ताज की अन्य मीनारें जस की तस हैं। चौड़ाई और लंबाई दोनों गतिविधियों को ध्यान में रखकर किए गए अध्ययन में ये साफ हो गया कि सभी मीनारों में बदलाव की खबरें अप्रासंगिक हैं। ये तथ्य भौगोलिक प्रमाणिकता के आधार पर मंजूर सीमाओं के तहत पूरी तरह से सही हैं।
एएसआई ने भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सर्वेक्षक निदेशक से यह निवेदन किया है कि भौगोलिक अध्ययन के लिए कोई दल इस साल के लिए नियुक्ति करे या फिर किसी अन्य संगठन/संस्थाओं के बारे में जानकारी दे, जो इस बारे में स्पष्ट जानकारी दे सके। हलफनामे में कहा गया है कि ताजमहल जैसी सभी महत्वपूर्ण इमारतों का हर साल भौगोलिक सर्वेक्षण और अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि आने वाले वर्षों में उनके ढांचागत व्यवहार के बारे में नजदीक से पूरी जानकारी मिल सके। याद रहे कि जस्टिस डीके जैन की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने पिछली सुनवाई में एसआई को छह वर्ष पुराने आंकड़ों के आधार पर हलफनामा दायर करने पर कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ताज के मामले में सन 1980 से लगातार आदेश जारी कर रही है।
गौरतलब है कि एएसआई ने पिछले हलफनामे में कहा कि सीबीआरआई की ओर से भी एक सर्वे किया गया था जिसमें ताज में कोई ढांचागत परेशानी नहीं पाई गई। सर्वोच्च अदालत ने 17वीं शताब्दी में बने प्रेम के इस प्रतीक पर खतरे की खबर पर स्वत: संज्ञान लेकर 14 अक्टूबर, 2011 को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया था। सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि खबर में कहा गया है कि यमुना का पानी बड़े पैमाने पर एक प्रणाली के जरिए नींव को बरकरार रखने में सहायता करता है जिससे भवन में स्थित कुओं के सिस्टम, मेहराबों और लकड़ी के पहियों को भी सहायता मिलती है। क्योंकि सूखने पर नींव में स्थित साल लड़की बिखर कर टुकड़ों में बंट सकती है।












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