7 महीने बाद परिवार को बच्चे सौंपेगी नॉर्वे सरकार

दोनों बच्चों में से एक की उम्र एक साल से भी कम तथा दूसरे की उम्र 4 साल है। बच्चों के पिता अनुरूप भट्टाचार्य ने बताया कि यह उनके लिए बहुत बड़ी राहत की खबर है। उन्होंने कहा कि हम पिछले 7 साल से अपने बच्चों को वापस पाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने बताया कि जिस समय हमारे बच्चों को हमसे अलग किया गया था उस समय उनके छोटे बच्चा केवल 4 महीने का था।
नार्वे में पालन-पोषण के बहुत सख्त नियम हैं। ये दंपत्ति अपने बच्चों को अपने साथ सुलाते थे। इतना ही नहीं बच्चों की मां उन्हें हाथ से खाना खिलाती थी। जिस वजह से वहां की सरकार ने बच्चों को यह कहते हुए अलग कर दिया कि इससे बच्चों को इंफेक्शन हो सकता है। बच्चों के माता-पिता ने भारतीय सरकार का भी शुक्रिया अदा किया है।
वैसे यह मामला पूरी तरह से अलग-अलग देशों की अलग संस्कृति का है। हमारे देश में बच्चों का पालन-पोषण इसी तरह से किया जाता है। जबकि नॉर्वे में इन तरीकों को गलत समझा जाता है। जिस वजह से यह मुश्किल सामने आई है।












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