...क्योंकि हर एक वोट जरूरी होता है

आपने वो विज्ञापन तो देखा ही होगा कि 'हर एक फ्रेंड जरूरी होता है'। विभिन्न राजनीतिक दल अब यही फंडा 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में अपना रहे हैं। इसमें बस थोड़ा सा ही ट्विस्ट है। इस विज्ञापन का सबसे ज्यादा असर राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर हुआ है। जिस वजह से वे धडाधड़ रैलियां कर रहे हैं। राहुल गांधी और अखिलेश यादव के लिए हर फ्रेंड चाहें जरूरी न हो लेकिन हर वोट जरूर जरूरी है।
एयरटेल के इस विज्ञापन को देखने के बाद भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी सोच रहे होंगे कि काश यह विज्ञापन 1998 में आ गया होता। उन्होंने हर एक वोट जरूरी के कांसेप्ट को नहीं समझा और केंद्र में उनकी सरकार 1998 में मुंह के बल गिर गई। लोकसभा में शक्ति परीक्षण के दौरान जयललिता ने अटल जी को एक वोट नहीं दी और उनकी प्रधानमंत्री की कुर्सी खिसक गई।
हर एक वोट जरूरी होता है के आंकड़े ने सिर्फ भारत की राजनीति हो नहीं बल्कि विश्व की राजनीति पर भी अपना प्रभाव डाला है। हिटलर जिसने दुनिया को 2 विश्व युद्धों की त्रासदी के हवाले किया था सिर्फ एक वोट की वजह से इतना ताकतवर बन गया था। हिटलर 1 वोट की मदद से 1923 में नेशनल सोशलिस्ट (नाजी) का मुखिया बना था।
आज जिस अंग्रेजी का प्रभुत्व पूरी दुनिया में है उसके लिए भी एक वोट ही जिम्मेदार है। 1776 में 1 वोट ने यह तय किया था कि अमेरिका में जर्मन भाषा बोली जाएगी या फिर अंग्रेजी। इस मुकाबले में अंग्रेजी को सिर्फ 1 वोट से जीत मिली थी। जिसके बाद अमेरिका ने अंग्रेजी का प्रसार पूरी दुनिया में किया और नतीजे आज आपके सामने हैं।
एक वोट ने पूरी दुनिया की तस्वीर काफी हद तक बदल डाली। ऐसे में जब एक वोट का असर पूरी दुनिया पर इतना पड़ सकता है तो हमारे प्रदेश पर क्यों नहीं। ऐसे बहुत से लोग हैं जो यह सोचते हैं कि उनके एक वोट से चुनावों पर या उनके नतीजों पर क्या फर्क पड़ेगा। ऐसे लोग इन परिणामों से नसीहत ले सकते हैं। हमारे देश में वोटिंग परसेंट अक्सर 50 से 60 फीसदी तक रहता है।
ऐसे में जब लोग वोट करने ही नहीं निकलेंगे तो आखिर वो बदलाव कैसे ला पाएंगे। इसलिए अगर बदलाव लाना है तो हर किसी को अपनी वोट का इस्तेमाल करना ही पड़ेगा। क्योंकि हर एक वोट जरूरी है यार।












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