चार घंटे से कम सोते हैं बीएसएफ के जवान

bsf
नयी दिल्ली। अद्धर्सैनिक बलों में तनाव के चलते जवानों के एक दूसरे को मार देने या आत्महत्या के मामलों के बीच एक सरकारी अध्ययन में यह बात सामने आई है कि 70 प्रतिशत से ज्यादा जवान कम सो पाते हैं और अपने आला अधिकारियों की ओर से दुर्व्‍यवहार का सामना करते हैं। यह अध्ययन सीमा सुरक्षा बल के जवानों की सेहत और स्थिति का खुलासा करता है जो पाकिस्तान और बांग्लादेश की दो सबसे महत्वपूर्ण भारतीय सीमाओं पर पहरा देते हैं।

बीएसएफ के जवानों एवं अधिकारियों पर अपनी तरह का पहला अध्ययन भावनात्मक समझ और व्यावसायिक तनाव शीर्षक से किया गया है। जिसमें जोखिम भरे क्षेत्रों में तैनात जवानों के उच्च तनाव स्तर के अनेक कारण बताये गये हैं। हाल ही में गृह मंत्रालय को सौंपी गयी रिपोर्ट के मुताबिक, अध्ययन दिखाता है कि बल में तनाव का स्तर कुल मिलाकर उंचा है। यह अध्ययन अपने आप में शुरूआत है।

इसमें बल में तनाव के स्तर को मापने के लिए जरूरी समय और बहुत उचित संसाधन नहीं थे। तब भी यह जवानों के सामने आने वाली समस्याओं का संकेत देता है। रिपोर्ट के अनुसार, 70 प्रतिशत से ज्यादा जवानों ने बताया कि उन्हें पयाप्‍त नींद और आराम नहीं मिल रहा और अन्य दर्जों (जवानों तथा कांस्टेबलों) के लिहाज से यह संख्या ज्यादा है। कई ने तो बताया कि उन्हें नियमित चार घंटे से भी कम नींद मिल पाती है। इस तरह की शारीरिक थकान एवं नींद में कमी तनाव को बढ़ाती है और प्रदर्शन पर बुरा असर डालती है।

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