ममता-कांग्रेस में मतभेद तेज, मुश्किल में गठबंधन

वो अकेले चुनाव लड़ने में सक्षम है। ममता ने तो यहां तक कह दिया कि कांग्रेस चाहे तो वे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ सकती है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में दोनों दल सरकार में शामिल हैं वहीं केंद्र में दोनों यूपीए में सहयोगी हैं।
पहले एफडीआई, फिर पैट्रोल, उसके बाद लोकपाल और अब इंदिरा भवन के नांम को लेकर दोनों पार्टियों में खींच-तान चल रही है। लेकिन अभी तक कांग्रेस की ओर से बार-बार यही कहा जा रहा था कि सब कुछ ठीक-ठाक है।
लेकिन आज ममता के तीखे तेवर यह बताने में सफल रहे कि सब ठीक नहीं है। दोनों ही पार्टियों में गठबंधन टूट भी सकता है। जिसके जवाब में कांग्रेस ने कहा कि कांग्रेस को तेवर दिखाने वाले उसकी चुप्पी का नाजायज फायदा ना उठाये। कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी को किसी से डरने की जरूरत नहीं है।












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