राहुल गांधी का करियर न ले डूबे यूपी कांग्रेस!

Rahul Gandhi
लखनऊ। सभी जानते हैं कि उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी की प्रतिष्‍ठा दांव पर लगी हुई है, लेकिन कांग्रेसी कार्यकर्ता व नेता इस बात को समझने के लिए तैयार नहीं हैं। राज्‍य में टिकट के बंटवारे को लेकर आपसी मतभेद जारी है, जिसका साफ उदाहरण तब देखने को मिला जब खुद पार्टी कार्यकर्ता वरिष्‍ठ नेताओं के खिलाफ धरने पर बैठ गये।

आक्रोषित कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा आखिरकार फूट ही पड़ा कार्यकर्ताओं ने पार्टी मुख्यालय पर धरना दिया और प्रदेश अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग की। पार्टी अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी व उनके करीबियों पर पक्षपात का आरोप लगा रहे कार्यकर्ताओं ने कहा कि वर्षों से पार्टी की सेवा करने के बाद भी उन्हें इसका फल नहीं मिला जबकि नये चेहरों व सिफारिशी लोगों को पार्टी आला कमान तवज्जो दे रहा है।

कांग्रेस ने प्रत्याशियों की सूची चुनाव की घोषणा से कुछ ही पहले की। हालांकि अभी तक सभी नामों से पर्दा नहीं उठा है लेकिन कार्यकर्ताओं को विरोध अवश्य सामने आ गया है। उम्मीदवारों के नामों के तय किए जाने में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर दिया। अपने करीब पचास सहयोगियों के साथ धरने पर बैठे चन्द्र किशोर अवस्थी ने कहा कि चुनाव में पार्टी ने ऐसे लोगों को प्रत्याशी बनाया है जो दूसरे दलों से आये हैं। हमेशा पार्टी के लियें काम करने वालों को दरकिनार कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व में अपने मूल कार्यकर्ता की अनदेखी की है और ऐसे लोगों को टिकट दे दिया जिन पर किसी का हाथ है या फिर किसी बड़े नेता व मंत्री ने उसकी सिफारिश की हैं। उन्होंनें प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के इस्तीफे की मांग भी की और आरोप लगाया कि उनके इशारे पर ही बाहरी लोगों को टिकट दिया गया है। जब धरना चल रहा था तब श्रीमती जोशी अपने कार्यालय में थीं। कार्यालय में होने के बाद भी उन्होंने इस पूरे प्रकरण पर कोई प्रतिक्रिया दर्ज नहीं की। पार्टी नेताओं का कहना था कि यदि रीता बहुगुणा जोशी कार्यकर्ताओं के इस विरोध को गलत मानती तो अवश्य मौके पर पहुंचकर लोगों को ऐसा करने से रोकती हैं उन्हें भी इस बात का पता है कि आखिरकार सच्चाई क्या है।

ऐसे में विपक्षी दल तो काफी खुश हैं, लेकिन कांग्रेस के लिए यह खतरे की सबसे बड़ी घंटी है। अगर समय रहते राहुल गांधी ने खुद हस्‍तक्षेप नहीं किया तो उनका राजनीतिक करियर पूरी तरह डूब सकता है। बाद में भले ही पार्टी उन्‍हें पीएम पद का दावेदार मानती रहे, लेकिन लोगों की नजरों में वो किसी हारे हुए सिपाही से कम नहीं होंगे।

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