यूपी महासंग्राम: हाथी पर सवार नहीं होना चाहते बादशाह

Mayawati
लखनऊ। लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट के बाद श्रम मंत्री पद से हटाये गये बादशाह सिंह अब बसपा के टिकट पर चुनाव नहीं लड़ेंगे। बसपा से हटाये जाने की अटकलों के बीच यह बात बादशाह सिंह ने स्वयं कही। वहीं उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें भी तेज हो गयी हैं।

बादशाह सिंह ने लोकायुक्त रिपोर्ट पर अपनी सफाई दी और कहा कि बुंदेलखंड के महोबा की अदालत ने उन जमीन और मकान को उनका माना है जिसके आधार पर लोकायुक्त ने उनके खिलाफ रिपोर्ट दी थी। उन्होंनें कहा कि पहले वह चुनाव नहीं लडऩा चाहते थे लेकिन समर्थकों के दबाव पर विधानसभा का आगामी चुनाव लडऩे पर राजी हो गये हैं। उन्होंनें कहा कि यदि वह चुनाव नहीं लड़ते तो उनके इलाके की जनता में उनके गलत होने का संदेश जाता जो वह किसी हालत में नहीं चाहते थे।

सिंह ने कहा कि वह अभी तक बसपा में हैं लेकिन इस पार्टी से चुनाव लडऩा नहीं चाहते। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में कोई निर्णय वह आगामी 12 जनवरी को बुंदेलखंड के बखेरा इलाके में होने वाली रैली में ही तय करेंगे। श्री ङ्क्षसह ने कहा कि अब आक्रामक होना जरूरी हो गया है। उन्होंनें दावा किया कि अपने राजनीतिक जीवन में वह हमेशा चरित्रवान रहे और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंनें कहा कि परिसीमन के बाद मौदहा विधानसभा सीट खत्म हो गयी है इसलिये अब वह महोबा सीट से मैदान में उतरेंगे।

उधर सिंह के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की चर्चा है भाजपा नेताओं ने भी उनके पार्टी में शामिल होने का संकेत दिया। बादशाह मोहदा से चार बार विधायक चुने गये। मोहदा सीट से वह भाजपा के टिकट पर तीन बार विधायक बने। विधानसभा के पिछले चुनाव के पहले वह बसपा में शामिल हुये और जीतने के बाद श्रम मंत्री बनाये गये।

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