सीबीआई होती लोकपाल में तो चिदंबरम जेल में होते: अन्ना हजारे

अन्ना ने साफ कहा कि सरकार इसलिए लोकपाल के अंदर सीबीआई को लेकर नहीं आ रही है। क्योंकि उसे पता है कि उसके आधे मंत्री सीबीआई के हत्थे चढ़ जायेंगे। वहीं टीम अन्ना ने कहा कि सीबीआई लोकपाल बिल की आत्मा थी, जब उसे ही निकाल दिया गया तो आप समझ सकते हैं कि लोकपाल की क्या हैसियत रह जायेगी।
आपको बता दें सरकार आज संसद में लोकपाल बिल को पेश करने वाली है। सरकार के इस लोकपाल बिल में केस लड़ने के लिए एक टीम होगी और जांच करने के लिए भी एक टीम होगी। ग्रुप सी के कर्मचारियों को लोकपाल से हटाकर सीवीसी के अंदर दाखिल किया गया है। लोकपाल आठ सदस्यों की एक संस्था होगी जिसमें आधे यानि कि चार सदस्य आरक्षण के माध्यम से चुने जाएंगे।
दलित, पिछड़ों को आरक्षण दिया जाएगा। लोकपाल के आधे सदस्य ज्यूडिशियल बैक ग्राउंड के होंगे और पांच सदस्यों की एक कमेटी लोकपाल को चुनेगी। लोकपाल कमेटी पांच साल के लिए चुनी जाएगी। कमेटी के सदस्यों के चयन की खास प्रक्रिया होगी।
चयन प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, नेता विपक्ष लोकसभा, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के साथ ही एक सदस्य की नियुक्ति राष्ट्रपति के जरिए होगी। लोकपाल कमेटी के चेयमैन या मेंबर को तभी हटाया जा सकेगा जब 100 सांसद इसके लिए प्रस्ताव लाएंगे।












Click it and Unblock the Notifications