संसद में खाद्य सुरक्षा बिल आज होगा पेश, कुछ राज्यों ने किया विरोध

इन लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक भ्रम और त्रुटियों से भरा हुआ हैं। यहां आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रविवार को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक को मंजूरी दी।
जयललिता ने केंद्र सरकार से कल्याणकारी योजनाओं को बनाने और उन्हें लागू करने का जिम्मा राज्यों पर छोड़ने और खाद्य विधेयक के दायरे से तमिलनाडु को बाहर रखने का भी अनुरोध किया। तो बिहार के सीएम नीतीश कुमार का कहना है कि यह तो लोगो के साथ नाइंसाफी है। एक ही चीज को अलग-अलग आदमियों को अलग-अलग बेचा जा रहा है जो कि एकदम गलत है।
आपको बता दें कि खाद्य सुरक्षा बिल के अनुसार सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के 46 फीसदी लोगों को प्रत्येक महीने 7 किलो अनाज दिया जाएगा। इस योजना का सीधा लाभ गरीबों की रेखा के नीचे रह रहे लोगों को मिलेगा। शहरी क्षेत्रों के 28 प्रतिशत लोगों को इस योजना का लाभ मिलेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में 3 रूपए किलो चावल, 2 रूपए प्रति किलो गेंहू और 1 रूपए प्रति किलो दाल मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में 75 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 50 फीसदी लोगों को इस कानून के तहत भोजन का अधिकार मिलेगा। गर्भवती और अभावग्रस्त महिलाओं को मुफ्त भोजन और मिड डे मील से कार्यक्रमों में खाने की व्यवस्था शामिल है।












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