इस बार ठंड तोड़ेगी रिकॉर्ड

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, ला-निना दो से सात वर्ष के अंतराल में अधिक सक्रिय होता है। इससे तापमान काफी नीचे चला जाता है। ला-निना का असर दिसंबर में कुछ-कुछ दिखाई देने लगा है लेकिन अगले दो महीने ज्यादा दिखेगा। ला-निना और एल-निनो, यह दोनों ही प्रशांत महासागर के तल से उठने वाली हवा पर आधारित प्रक्रिया है। ला-निना तब अधिक सक्रिय होता है, जब समुद्र की सतह ठंडी होती है और एल-निनो सतह गरम होने पर सक्रिय होता है।
ला-निना के प्रभाव से इस बार विश्व के कुछ क्षेत्रों में अधिक ठंड, कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और कुछ में आने वाले समय में अधिक गर्मी पड़ेगी। टोक्यो स्थित आरआईजीसी के मुताबिक अगले साल भारत भीषण बारिश भी होगी। हालांकि अमेरिका समेत कई इलाकों में गर्मी का वातावरण रहेगा।












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