गुरुद्वारे में लंगर चलाने को लाइसेंस की जरुरत नहीं: कोर्ट

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वी के बंसल ने महरौली स्थित गुरुद्वारा बाबा बंद बहादुर के सुंदरम लंगर हॉल को बंद करने के मजिस्ट्रेटी अदालत के आदेश को दरकिनार करते हुए उसे फिर से खोलने के आदेश दिये।
मजिस्ट्रेटी अदालत ने देशराज नाम के एक व्यक्ति की ओर से गुरुद्वारे के लंगर को बिना लाइसेंस के चलाना स्वीकार किये जाने के बाद उसे बंद करने के आदेश दिये थे। अतिरिक्त सत्रा न्यायाधीश बंसल ने कहा मैंने पाया कि उच्चतम न्यायालय की ओर से स्पष्ट की गई कानून की स्थिति के अनुसार लंगर गुरुद्वारे का हिस्सा है जिसका संचालन जरुरतमंद लोगों के लिए किया जाता है।
लंगर में कोई भी श्रद्धालु या कोई व्यक्ति भोजन कर सकता है जिसके लिए उसे कोई भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने गुरुद्वारा बाबा बंदा बहादुर प्रबंधक कमेटी की याचिका पर सामुदायिक लंगर को खोलने के आदेश दिये। यह याचिका मजिस्टेट के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थी जिसमें दलील दी गई थी कि देशराज का लंगर के संचालन से कुछ लेना देना नहीं है।












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