मायावती अब मांगेगी आपदा राहत पैकेज

गौरतलब है कि वर्ष 2007 की अधिसूचना के मुताबिक केन्द्र सरकार जम्मू कश्मीर व लद्दाख को छोड़कर देश के अन्य हिस्सों में शीतलहर को दैवी आपदा नहीं मानती। राजस्व विभाग के सूत्रों की माने तो केन्द्र की अधिसूचना में बर्फबारी, तूफान, बादल फटना, सूखा, भूकम्प, सुनामी, अग्निकाण्ड, बाढ, ओलावृष्टि, भूस्खलन एवं टिड्डी दल दैवी आपदा में शामिल हैं लेकिन शीतलहर को केन्द्र दैवी आपदा नहीं मानता। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर वर्ष 2007 में ही अधिसूचना जारी कर शीतलहर को दैवी आपदा की श्रेणी में रख दिया।
इसी अधिसूचना का सहारा लेते हुए राज्य सरकार ने केन्द्र को पत्र लिखा और अपील कि शीत लहर को दैवी आपदा माना जाए। सूत्रों के अनुसार यदि केन्द्र सरकार शीतलहर को भी दैवी आपदा के रूप में अधिसूचित कर देती है तो उससे होने वाली क्षति पर शत-प्रतिशत सहायता राज्य को केन्द्र से प्राप्त हो जाएगी। इसी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री मायावती ने केन्द्र को पत्र लिखकर वर्ष 2011 में राज्य में शीत लहर के प्रकोप को दैवी आपदा घोषित किए जाने का प्रस्ताव पेश किए किसा है।












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