राज्य का विभाजन माया का कोई खेल तो नहीं: कांग्रेस

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि सुश्री मायावती ने विधानमंडल में पारित चार लाइन के प्रस्ताव पर राज्य के चार हिस्सों में विभाजन का पत्र केन्द्र सरकार को भेज दिया लेकिन राज्य के बीस करोड़ लोगों के भाग्य को चार लाईन के पत्र से तय नहीं किया जा सकता। उन्होंनें कहा कि यूपी सरकार को केन्द्र सरकार द्वारा भेजा पत्र किसी भी तरह से असंवैधानिक नहीं है और उसमें कही बातें गोपनीय भी नहीं हैं जिससे उसे छिपाया जाना आवश्यक हो। श्रीमती जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद प्रधानमंत्री मनमोहन ङ्क्षसह समेत केन्द्रीय मंत्री को पत्र भेजने के पहले उसे मीडिया को जारी कर देती हैं। ऐसे में यह आरोप लगना कि पत्र की गोपनीयता भंग हो गयी सरासर गलत है।
श्रीमती जोशी ने साफ किया कि पत्र में किसी भी प्रकार की गोपनीय बाते नहीं हैं। उन्होंने बताया कि केन्द्र के पत्र में राज्य सरकार से प्रस्तावित चार राज्यों की राजधानी, उनकी सीमा और देनदारियों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गयी है जिसका मांगा जाना न्यायोचित है। उन्होंने कहा कि पार्टी चाहती है कि उत्तर प्रदेश के बंटवारे को लेकर पहले जनमत संग्रह हो और उसके आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की जाए तथा उस पर बहस हो तभी तय हो सकेगा कि राज्य विभाजन का निर्णय किस हद तक जनता के हित में है। श्रीमती जोशी ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में उनकी पार्टी के दो विधायको ने निजी प्रस्ताव के जरिये राज्य विभाजन का मुद्दा उठाया था लेकिन सुश्री मायावती इस पर बहस कराने को तैयार नहीं दिखीं थीं।












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