घरेलू औरतें पढाएगी तिहाड़ के कैदियों को

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के सहयोग से परियोजना पढ़ो या पढ़ाओ की शुरुआत की गई है। हिंदी और सामाजिक विज्ञान में बीएड करने वाली गर्ग ने कहा कि मैं हमेशा शिक्षा के पेशे को अपनाना चाहती थी लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा कभी नहीं हो सका क्योंकि मेरे बच्चों को मेरे वक्त और देखरेख की जरूरत थी।
उन्होंने कहा कि बच्चे बड़े हो गये हैं और अब मेरे पास पर्याप्त वक्त है। इसलिए जब मैंने अखबार में विज्ञापन देखा तो मैंने इसे स्वीकार करने का निर्णय किया क्योंकि यह एक नेक काम है और पढ़ाने का मेरा सपना पूरा होगा। तिहाड़ जेल ने पिछले महीने आवेदन मांगे थे। तिहाड़ के प्रवक्ता सुनील गुप्ता ने कहा कि हमें सौ से ज्यादा मेल प्राप्त हुए और हमने 64 लोगों का चुनाव किया जो विभिन्न क्षेत्रों के हैं।
जो लोग चुने गये हैं उनमें पांच गृहिणियां और दस छात्र हैं। एक अन्य जेल अधिकारी ने कहा कि आईआईटी रूड़की के एक छात्र ने स्वेच्छा से पढ़ाने को स्वीकार किया लेकिन बाद में उसने अपनी मां को पढ़ाने का मौका दिया। वह करीब 48 वर्ष की हैं और उच्च शिक्षित हैं। उन्हें कैदियों के शिक्षक के रूप में चुना गया है।












Click it and Unblock the Notifications