यूपी: कांग्रेस व मुसलमानों की नजदीकी से सपा में बेचैनी

श्री हसन ने कहा कि मुसलमानों की बदहाली का आकलन करने के लिये कांग्रेस ने ही सच्चर कमेटी और रंगनाथ कमेटी का गठन किया था लेकिन दोनों कमेटियों की रिपोर्ट आने के बाद भी कांग्रेस ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को झांसे में रखा गया और रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। श्री हसन ने कहा कि राज्य में विधानसभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं इसलिये कांग्रेस मुसलमानों के लिये फर्जी घोषणायें कर इस समुदाय को अपनी ओर करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंनें प्रश्न उठाते हुए कहा कि केन्द्र में पिछले साढ़े सात साल से कांग्रेस की सरकार है फिर भी अब तक मुसलमानों के लिये आरक्षण लागू नहीं किया गया। दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा में भी कांग्रेस की सरकार है लेकिन वहां भी मुसलमानों के लिये आरक्षण लागू नहीं हुआ। श्री हसन ने कहा कि केन्द्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार यदि मुसलमानों की सच्ची हितैषी है तो सच्चर कमेटी तथा रंगनाथ कमेटी की सिफारिशों को जल्द लागू करे।
उन्होंनें कहा कि वाराणसी में बुनकरों के लिये कांग्रेस ने जिस पैकेज की घोषणा की है उससे गरीब बुनकरों और उनके उद्योग को कोई फायदा नहीं हो सकेगा। कांग्रेस के साथ उन्होंने बसपा को भी निशाना पर रखा और कहा कि बहुजन समाज पार्टी भी मुसलमानों से झूठे वायदे कर रही है। बसपा ने 2008 में अरबी फारसी विश्वविद्यालय कायम करने का वायदा किया था लेकिन करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी विश्वविद्यालय में पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी।
श्री हसन ने कहा कि सपा ने अपने कार्यकाल में पुलिस भर्ती में 14 प्रतिशत मुसलमानों को जगह दी जबकि बसपा के कार्यकाल में मुसलमानों का प्रतिशत दो ही रहा। सपा की इस प्रकार की बयानबाजी बताती है कि कांग्रेस व मुसलमानों में बढ़ती नजदीकी सपा को सुहा नहीं रही है। हालांकि चुनाव नजदीक आते ही सपा व कांग्रेस ही नहीं बल्कि बसपा भी मुस्लिमों को अपनी ओर मिलाने के लिए नये-नये पैंतरे अपना रही है।












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