चूहे होते हैं दिल के उदार और दयालू

हैरान करने वाली बात तब सामने आयी जब उन्होंने देखा कि चूहेदानी में फंसे अपने साथी के लिये बाहर का चूहा काफी परेशान नजर आया। दिलचस्प बात यह पायी गयी कि चुहिया चूहों की तुलना में अधिक संवेदनशील नजर आयी। डेली मेल के अनुसार प्रयोग के दौरान पाया गया कि चूहेदानी में फंसे चूहे को देखकर आसपास चक्कर लगाता दूसरा चूहा काफी गुस्से में है। इससे साबित हुआ कि वह तकलीफ देखकर व्यथित है। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह रही कि आजाद चूहा यह समझ गया कि कैसे ट्यूब से उसे निकाला जा सकता है। साइंस पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट में अध्ययन के अगुआ इनबाल बेन एमी बर्टल ने कहा कि हम इन चूहों को प्रशिक्षित नहीं कर रहे हैं। वे अंदर की भावना से प्रेरित होकर सीख रहे हैं। हम उन्हें नहीं दिखा रहे कि कैसे चूहेदानी का दरवाजा खोला जाय।
प्रयोग में पाया गया कि चूहेदानी में रखे गये खिलौने को छुड़ाने में चूहों की दिलचस्पी नहीं थी। वास्तविक चूहे के लिये ही वे बैचेन थे। बर्टल ने कहा कि दरवाजा खोलना काफी कठिन था। लेकिन वे अनवरत प्रयास करते रहे और आखिरकार सफल रहे । प्रयोग के अगले चरण में उन्हें चाकलेट लेकर लालच दिखाकर परखा गया। हैरानी की बात थी कि आजाद चूहे ने फंसे साथी को मुक्त कराने तक मनपसंद चाकलेट नहीं खाया। अनुसंधानकर्ता पेगी मैसन ने कहा कि यह काफी भावनात्मक था। चाकलेट की तुलना में चूहेदानी में फंसे चूहे की आजाद चूहे को अधिक चिंता थी । हम हतप्रभ थे। रिपोर्ट के अनुसार चूहे की तुलना में चुहिया का अपने साथी को छुडाने के लिये किया गया अधिक प्रयास मातृत्व के गुण को दर्शाता है कि वे अधिक उदार और दयालू होती हैं ।












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