सिंधवी ने लोकपाल रिपोर्ट को संसद में किया पेश

कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया तो बसपा ने भी पीएम को लोकपाल के दायरे में लाने की मुखालफत की। स्थायी कमेटी की रिपोर्ट कह रही है कि अगर पीएम कुर्सी पर विराजमान है तो उनके खिलाफ लोकपाल काम नहीं कर सकता है हां अगर पीएम अपने पद पर नहीं रहते हैं तो उन पर मुकदमा चल सकता है। जिससे सांसद सहमत नहीं दिखे। हां, लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने पर समिति में सहमति जरूर बन गई है।
फिलहाल सरकार ने मौजूदा शीत सत्र में लोकपाल बिल पेश करके अपना वादा पूरा कर दिया है। लेकिन इस बिल को लेकर अभी भी टीम अन्ना को ऐतराज है। रिपोर्ट में केंद्र और राज्य में एक ही बिल के जरिए लोकपाल और लोकायुक्त बनाने की बात कही गई है। यही नहीं स्टैंडिग कमेटी ने सी ग्रेड के कर्मचारियों को लोकपाल के अंदर नहीं रखा है। जिसकी खिलाफत अन्ना और अन्ना टीम कर रही है।
इसके अलावा सीबीआई को भी कमेटी की ओर से लोकपाल के अंदर नहीं रखा गया है। कमेटी का कहना है कि सीबीआई पर लोकपाल नजर जरूर रख सकता है लेकिन वो उसके काम में कोई हस्तकक्षेप नहीं करेगा। रिपोर्ट संसद में पेश होने के बाद सरकार कमेटी की सिफारिशों का अध्ययन करेगी और जरूरत पड़ने पर बदलाव किए जाएंगे। जिसका टीम अन्ना विरोध कर रही है।












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