काले धन के समस्‍या पर भारत लेगा वैश्विक सहयोग

pranab mukherjee
नयी दिल्ली। कर चोरी तथा काले धन की समस्या से निपटने के लिये भारत ने अंतरराष्‍ट्रीय सहयोग के साथ कर प्रणाली को वैश्विक स्तर पर जोड़े जाने का आज आह्वान किया। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कर और समानता पर वैश्विक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ क्षेत्रों में कर प्रणाली में पारदिर्शता के अभाव से चुनौतियां बढ़ रही हैं। जी-20 द्वारा उठाये गये कदमों के बाद इस मामले में चीजें कुछ आगे बढ़ी हैं।

हमें इसे तार्किक परिणति तक पहुंचाने की जरूरत है। वैश्विक स्तर पर कर चोरी से निपटने के लिये अंतरराष्‍ट्रीय सहयोग की जरूरत को रेखांकित करते हुए मुखर्जी ने ग्लोबल फाइनेंशियल इंटीग्रिटी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं तथा विकासशील देशों से अवैध तरीके से सालाना औसतन 725 से 810 अरब डालर की पूंजी बाहर ले जायी जा रही है।

उन्होंने कहा कि कर चोरी प्रगतिशील कर नीति के लाभ को कमजोर करती है। मंत्री ने कहा कि इन मुद्दों के हल के लिये अंतरराष्‍ट्रीय सहयोग तथा सीमापार बेहतर तालमेल के लिये कर प्रणाली को जोड़े जाने की जरूरत है। घरेलू मोर्चे पर मुखर्जी ने उम्मीद जतायी कि देश में नयी आयकर व्यवस्था लागू करने के लिए प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) अप्रैल, 2012 से अमल में आ जाएगी।

यह 1961 के आयकर कानून का स्थान लेगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित प्रत्यक्ष कर संहिता प्रत्यक्ष करों के संबंध में नीतिगत बदलाव लाएगी। इसे अगले वित्त वर्ष से अमल में लाया जाना है। कर प्रणाली को आधुनिक बनाने के प्रयास के तहत सरकार ने आयकर कानून, 1961 के स्थान पर नयी व्यवस्था लाने का प्रस्ताव किया है।

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