प्रत्याशियों के चुनाव खर्च पर आयोग की पैनी नजर

UP Vidhan Sabha
लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव धनबल और बाहुबल के बल पर जीतने का सपना देख रहे प्रत्याशियों को इस बार करार झटका लगेगा। निर्वाचन आयोग की पैनी निगाह प्रत्याशियों के चुनावी खर्चे पर होगी। चुनाव के नाजायज धन के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने के लिए पहली बार सूक्ष्म प्रेक्षकों की भी तैनाती की जायेगी।

आयोग की ओर से नियुक्त चुनाव व्यय प्रेक्षकों के अलावा विभिन्न सम्बन्धित विभाग भी इसमें भागीदार होगा। पुलिस, आयकर, सीमा शुल्क और कस्टम के अधिकारी प्रत्याशियों के खर्च पर नजर रखेंगे। पेड न्यूज और अवैध प्रचार सामग्री पर निंयत्रण का जिम्मा मीडिया सार्टिफिकेशन एण्ड मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) को सौंपा गया है। राज्य स्तर पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में चुनाव खर्च अनुश्रवण समिति बनायी जायेगी, जबकि जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी रहेगी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा के मुताबिक इस बार विधानसभा चुनाव के खर्च की सीमा 10 से बढ़ाकर 16 लाख कर दी गयी है। चुनाव खर्च को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देशों के साथ-साथ चुनाव सम्बन्धी भ्रष्ट आचरण और चुनाव अपराधों पर पुस्तिका तैयार कराई गयी है, जो सभी राजनीतिक दलों, चुनाव से जुड़े अधिकारियों, रिटर्निंग अफसर एवं अन्य सम्बन्धित लोगों को वितरित की जायेगी। पेड न्यूज व प्रत्याशियों की ओर से छपवाई जाने वाली प्रचार सामग्री में मुद्रक के नाम पर उल्लेख जरूरी होगा। पेड न्यूज में प्रत्याशी को दो गवाहो के भी दस्तखत कराने होंगे।

चुनावी खर्चों पर निगरानी की नई व्यवस्था के तहत व्यय अनुश्रवण कन्ट्रो रूम व अनुश्रवण प्रकोष्ठ का गठन भी किया जायेगा। इसमें आयकर, केन्द्रीय उत्पाद कर, भारत सरकार के ऑडिट व लेखा विभाग के अधिकारी तथा राज्य व केन्द्र सरकार के अधिकारी शामिल होंगे। वहीं नामांकन के एक दिन पहले उम्मीदवार को एक अलग बैंक खाता खोलना होगा। चुनाव सम्बन्धी सभी लेन-देन इसी खाते के माध्यम से होंगे।

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