चिंकारा मामले में सेना और वन विभाग के बीच मतभेद
जयपुर।
सैन्य अभ्यास के लिए बाड़मेर के शिव तहसील में पंहुची 88 बख्तरबंद की कार्यशाला के लंगर में लुप्त हो रहे वन्यजीव प्रजाति चिंकारा के तीन सिर और मांस जब्त होने के मामले में सेना और राजस्थान के वन विभाग के बीच जांच को लेकर टकराव लगातार बढ़ रहा है। वन्य विभाग कह रहा कि आरोपी जांच के लिए हाजिर नहीं हो रहे है। id="toptextpromo">वन
विभाग द्वारा आरोपित पांच आरोपियों सूबेदार गोपी लाल, हवलदार जी आर नाथ, सिपाही डी आर नायडू और एक लांस नायक आज फिर पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए, दूसरी ओर सेना के कोर्ट आफ इन्क्वायरी में गवाही के लिए बुलावे के बावजूद उप वन सरंक्षक बी. आर. भादू ने गवाही देने से ही इंकार कर दिया। id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'> id='top-searched-articles'>भादू
ने आज कहा कि चिंकारा शिकार प्रकरण में लगातार दूसरे दिन गैर हाजिर रहने वाले आरोपियों को मंगलवार को हाजिर होन के लिए भारतीय वन संरक्षण अधिनियम की धारा 50 के तहत सम्मन भेजे गये है। उन्होंने कहा कि 88 बख्तरबंद कार्यशाला के लेफ्टिनेंट कर्नल बी. एस. चन्देल को मंगलवार को जांच के लिए हाजिर होने के लिए सम्मन पहले ही भेजा जा चुका है। उन्होनें कहा कि पाचों आरोपियों को पूछताछ के लिए आज भी बुलाया गया था लेकिन पाचों आरोपी लगातार दो बार से हाजिर नहीं होकर जांच में असहयोग कर रहे है।











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